परमाणु ठिकाने या तेल भंडार? क्या है नेतन्याहू का 'ऑपरेशन ईरान'; चिंता में क्यों इस्लामिक देश
इजरायल पर ईरान के मिसाइल हमलों के एक सप्ताह हो गए हैं, अभी तक इजरायल ने पलटवार नहीं किया है लेकिन ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि इजरायल ईरान के तेल कुओं और तेल भंडार पर हमला कर उसकी आर्थिक कमर तोड़ सकता है।

आज से ठीक एक साल पहले 7 अक्तूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला बोला था और करीब 1200 इजरायलियों को मौत के घाट उतार दिया था। इसके अलावा करीब 250 इजरायलियों को हमास आतंकियों ने बंधक बना लिया था और उन्हें अपने साथ ले गए थे। इस घटना के अगले दिन यानी 8 अक्तूबर, 2023 को इजरायल ने गाजा में हमास के ठिकानों पर हमले किए और तब से आज तक गाजा में इजरायली सेना कहर बरपा रही है। इस दौरान करीब 42000 फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है और करीब 92000 लोग घायल हुए हैं। गाजा एक तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका है, जहां की 60 फीसदी से ज्यादा इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं।
इसी दौरान ईरान से वित्त पोषित और उसके उकसावे पर हिज्बुल्लाह आतंकी भी पिछले एक साल से लगातार इजरायल पर हमले कर रहा है। अब इजरायल ने पिछले महीने से लेबनान पर कहर बरपाना शुरू किया है तो उधर ईरान ने पिछले मंगलवार को इजरायल पर करीब 200 मिसाइलों से हमला बोला दिया। इस हमले के बाद से मध्य-पूर्व और पश्चिम एशिया में तनाव गहराया हुआ है। इजरायल ने ईरान पर हमला करने की कसम खाई है लेकिन अमेरिका ने इजरायल को ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला नहीं करने की सख्त हिदायत दी है। इसके अलावा यह भी आशंका है कि अगर परमाणु ठिकानों पर हमले हुए तो यह पूरी दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो सकता है और युद्ध पश्चिम एशिया में भयानक रूप ले सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दिमाग में क्या चल रहा है और उनका ऑपरेशन ईरान क्या है?
इजरायल पर ईरान के मिसाइल हमलों के एक सप्ताह हो गए हैं, अभी तक इजरायल ने पलटवार नहीं किया है लेकिन ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि इजरायल ईरान के तेल कुओं और तेल भंडार पर हमला कर उसकी आर्थिक कमर तोड़ सकता है क्योंकि तेल का ही वह खेल है, जिसकी वजह से ईरान हमास से लेकर हिज्बुल्लाह और हूती विद्रोहियों को धन, हथियार और ट्रेनिंग उपलब्ध कराता रहा है। इसके अलावा इजरायल की नजर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल साइलोज और उसके एयरबेस पर ही।
निशाने पर दो दर्जन ठिकाने
अमेरिकी एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में ऐसे दो दर्जन से अधिक ठिकानें हैं, जहां ईरान की बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइल रखे गए हैं और उनमें से कुछ उनके प्रक्षेपण स्थल हैं। ये ठिकानें जमीन से 500 मीटर की गहराई में हैं। कुछ दिनों पहले नेतन्याहू ने चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि ईरान की ऐसी कोई जगह नहीं है, जहां उसकी पहुंच नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक सीमा से करीब 150 किलोमीटर की दूरी पर केनेष्ट इलाके में बैलिस्टिक मिसाइल के भंडार हैं। इस बेस पर शॉर्ट रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल फतेह तैनात हैं। इसके अलावा करमनशाह इलाके में ऐसी ही दूसरी साइट्स है, जहां कियाम और फतेह बैलिस्टिक मिसाइल तैनात हैं।
अमेरिकी रिपोर्ट में इस तरह के कुल 25 ठिकानों का जिक्र हैं। इसके अलावा 17 एयरबेस और 10 से ज्यादा फाइटर बेस हैं, जो इजरायल के निशाने पर हैं और नेतन्याहू पहले ही झटके में उसे शिकार बना सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए ईरान ने अपने एयरबेस, मिसाइल ठिकानों और तेल भंडारों की सुरक्षा बढ़ा दी है। हमलों की आशंका के मद्देनजर ईरान के तेल मंत्री मोहसेन पकनेजाद ने रविवार को देश के सबसे प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल खरग द्वीप का दौरा किया और सुरक्षा के मुद्दे पर नौसेना कमांडर के साथ बातचीत की।
खौफ में ईरान? सबसे बड़े तेल निर्यात डिपो पर पहुंचे मंत्री
ईरानी तेल मंत्रालय की समाचार वेबसाइट शाना के मुताबिक, मंत्री का ये दौरा इजरायल द्वारा तेल डिपो पर लक्षित हमले की आशंकाओं के बीच हुआ है। इससे पहले एक इज़रायली सैन्य प्रवक्ता ने शनिवार को कहा था कि इज़राइल पिछले हफ्ते तेहरान द्वारा किए गए मिसाइल हमले का जवाब सही समय पर सही तरीके से देगा। अमेरिकी समाचार वेबसाइट एक्सियोस ने भी इजरायली अधिकारियों के हवाले से कहा कि ईरान की तेल सुविधाओं पर हमला हो सकता है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इजरायल ने अभी तक यह निष्कर्ष नहीं निकाला है कि कैसे जवाब दिया जाएगा।
बता दें कि ईरान पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) का सदस्य है, जिसका उत्पादन लगभग 3.2 मिलियन बैरल प्रति दिन या वैश्विक उत्पादन का 3 प्रतिशत है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी तेल निर्यात इस साल 1.7 मिलियन बीपीडी के बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इसकी अधिकांश तेल और गैस संपदा देश के दक्षिण में स्थित है, जहां खरग द्वीप टर्मिनल स्थित है और जहां से लगभग 90 प्रतिशत ईरानी तेल निर्यात होता है। इस तेल टर्मिनल में 23 मिलियन बैरल कच्चे तेल को स्टोर करने की क्षमता है।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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