IRIS DENA के डूबने के बाद श्रीलंका के पास फंसा एक और ईरानी जहाज, लगाई मदद की गुहार

Mar 05, 2026 04:22 pm ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध अब हिंद महासागर में अपने पैर पसार रहा रहा है। ईरानी युद्धपोत डेना के डूबने के एक दिन बाद श्रीलंकाई सांसद की तरफ से बताया गया है कि एक और ईरानी जहाज ने बंदरगाह पर उतरने के लिए तुरंत अनुमति मांगी है।

IRIS DENA के डूबने के बाद श्रीलंका के पास फंसा एक और ईरानी जहाज, लगाई मदद की गुहार

पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी जंग अब बड़े स्तर पर हिंद महासागर में बढ़ती हुई नजर आ रही है। बुधवार को ईरानी युद्धपोत IRIS डेना के डूबने के बाद एक और ईरानी जहाज के अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र में मौजूद होने की खबर सामने आई है। श्रीलंका के सांसद नमल राजपक्षे ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यहां मौजूद एक ईरानी जहाज ने तुरंत ही बंदरगाह पर आने की अनुमति मांगी है।

सोशल मीडिया साइट एक्स पर इस बारे में जानकारी देते हुए श्रीलंकाई सांसद नमल राजपक्षे ने कहा, "हमें जानकारी मिली है कि एक अन्य ईरानी जहाज श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) में, हमारी समुद्री सीमा के ठीक बाहर मौजूद है और उसने सरकार से तुरंत बंदरगाह पर आने की अनुमति मांगी है। हालांकि, अभी तक उसे सरकार से मंजूरी नहीं मिली है।”

गौरतलब है कि राजपक्षे का यह बयान श्रीलंका के मीडिया मंत्री नलिंदा जयतिस्सा के बयान के बाद आया है, जिन्होंने कहा था कि एक दूसरा ईरानी युद्धपोत देश की समुद्री सीमा क्षेत्र के ठीक बाहर मौजूद है, हालांकि उन्होंने इससे ज्यादा जानकारी नहीं दी थी।

इससे पहले बुधवार को अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने भारत में युद्धाभ्यास करके लौट रहे ईरानी युद्ध पोत पर हमला बोल दिया था। टॉरपीडो से हुए इस हमले की वजह से यह युद्धपोत समंदर में समा गया और इसके साथ ही करीब 87 ईरानी नौसैनिकों की भी मौत हो गई। यह हमला ईरान से लगभग 2000 नॉटिकल मील दूर किया गया। हमले के तुरंत बाद ही इस जहाज ने मदद के लिए संदेश भेजा, जिसे श्रीलंकाई नौसेना ने रिस्पांड किया और मदद शुरू की। श्रीलंकाई सरकार के अनुसार, खोज और बचाव अभियान के दौरान 32 नाविकों को बचा लिया गया, लेकिन कई लोग अब भी समुद्र में लापता हैं और उन्हें मृत मान लिया गया है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह वॉशिंगटन के लिए “बहुत बड़ी जीत” है। उन्होंने कहा, “अमेरिका निर्णायक, विनाशकारी और बिना किसी दया के जीत रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे आदेश पर युद्ध विभाग ने शनिवार सुबह यह ऑपरेशन शुरू किया। अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि इजरायल के साथ मिलकर यह अभियान सफल हो।” दूसरी तरफ, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी द्वारा किए गए इस हमले की निंदा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने समंदर में जो यह काम किया है, इसके लिए उसे बड़ी कीमत चुकानी होगी, वह दिन जल्दी आएगा, जब वह इस पर पक्षताएगा।

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