तेल के भंडार वाला ईरान अब पेट्रोल के लिए मोहताज? सिर्फ 2 महीने का ईंधन बचा!
अपनी ही रिफाइनरियों के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने और मरम्मत के लिए पैसे न होने के कारण, तेल समृद्ध ईरान अब खुद पेट्रोल (Gasoline) आयात करने को मजबूर है।
महीनों तक चले अमेरिका के बमबारी अभियानों और नए व कड़े प्रतिबंधों के बाद ईरान एक गंभीर आर्थिक और ईंधन संकट के मुहाने पर खड़ा हो गया है। 'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि देश के पास अब केवल दो महीने का ईंधन रिजर्व बाकी बचा है।
अपनी ही रिफाइनरियों के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने और मरम्मत के लिए पैसे न होने के कारण, तेल समृद्ध ईरान अब खुद पेट्रोल (Gasoline) आयात करने को मजबूर है।
इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में ईरान के खिलाफ "ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट" का ऐलान करते हुए इसे ईरान के खिलाफ "इकोनॉमिक डी-डे" करार दिया था।
वाशिंगटन ने ईरान के कैस नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय फाइनेंस और तेल निर्यात को पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान को किसी भी प्रकार की आर्थिक संजीवनी देगा, उसे खुद गंभीर आर्थिक नतीजों का सामना करना पड़ेगा।
पिछले कई दशकों से प्रतिबंधों को दरकिनार करने वाला ईरान का फ्रंट कंपनियों, बेनामी टैंकरों और स्मगलिंग का नेटवर्क अब बेअसर साबित हो रहा है, क्योंकि तेहरान के पास अवैध रास्तों के भारी खर्च को उठाने के लिए भी विदेशी मुद्रा नहीं बची है।
UAE ने तोड़े वित्तीय रिश्ते, चीन पर अमेरिका का दबाव
ईरान की मुश्किलें उस समय और बढ़ गईं जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 19 अगस्त को ईरान के साथ सभी प्रकार के वित्तीय लेनदेन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए।
स्कॉटलैंड की सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली अंसारी के अनुसार, "ईरान बेहद गंभीर आर्थिक दबाव में है और हर्मुज की खाड़ी पर अपना नियंत्रण खो रहा है। अब सवाल यह है कि क्या वे बातचीत की मेज पर आएंगे।"
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया है कि चीन भी ईरान को अलग-थलग करने के अमेरिकी प्रयासों में सहयोग कर रहा है। इस महीने के अंत में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान यह मुद्दा प्रमुख रहेगा।
रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर, 70% तक पहुंची महंगाई
अमेरिकी नाकाबंदी का सीधा असर ईरान की आम जनता पर पड़ रहा है। रियाल की कीमत प्रति डॉलर 22 लाख रियाल हो गई, जो पिछले साल 10 लाख थी।
खाने-पीने की चीजें और जरूरी वस्तुओं की कीमत दोगुनी हो गई हैं। महंगाई दर 69.9% तक पहुंच गई।
इतना नहीं बेरोजगारी दर भी 9.1% हो गई है। तेहरान में एक निजी कर्मचारी महनाज़ ने रॉयटर्स को बताया, "हम हर गुजरते दिन के साथ और गरीब होते जा रहे हैं।" भुखमरी और ईंधन की किल्लत के बीच अब तेहरान के पास अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर आने के अलावा बेहद सीमित विकल्प बचे हैं।


