इस्लामाबाद में होगी दूसरे दौर की ईरान-US शांति वार्ता, पाकिस्तान ने फिर बघारी शेखी, दिन पर क्यों साधी चुप्पी
अधिकारियों ने पत्रकारों को दिए एक संदेश में बताया कि US की एक लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा टीम बातचीत की तैयारी के लिए पहले से ही इस्लामाबाद में मौजूद है। अधिकारियों ने अपना नाम न बताने की शर्त रखी, क्योंकि ये चर्चाएँ सार्वजनिक नहीं हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष और तनातनी के बीच मध्यस्थता कराने का दावा कर रहे पाकिस्तान ने एक बार फिर दावा किया है कि दोनों ही देशों के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता जल्द ही इस्लामाबाद में होगी। मामले की जानकारी रखने वाले इस्लामाबाद के अधिकारियों के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची US के साथ शांति वार्ता के संभावित दूसरे दौर के लिए शुक्रवार रात को पाकिस्तान की राजधानी पहुंचेंगे।
अधिकारियों ने पत्रकारों को दिए एक संदेश में बताया कि US की एक लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा टीम बातचीत की तैयारी के लिए पहले से ही इस्लामाबाद में मौजूद है। अधिकारियों ने अपना नाम न बताने की शर्त रखी, क्योंकि ये चर्चाएँ सार्वजनिक नहीं हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस्लामाबाद में US और ईरान के बीच शांति वार्ता का दूसरा दौर होने की उम्मीद है, हालाँकि उन्होंने यह नहीं बताया कि बातचीत कब होगी।
इस हफ्ते की शुरुआत में भी होनी थी वार्ता लेकिन…
US और ईरान इस हफ़्ते की शुरुआत में पाकिस्तान की राजधानी में शांति वार्ता करने वाले थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के साथ संघर्ष विराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने के बाद, उपराष्ट्रपति JD वेंस को इस्लामाबाद भेजने की योजना रद्द कर दी थी। इस्लामाबाद में US दूतावास के प्रवक्ता ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जबकि ईरान के दूतावास ने तत्काल कोई जवाब नहीं दिया।
रूस का तेहरान को पुरजोर समर्थन
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत वसीली नेबेंजिया ने जोर देकर कहा है कि जंग के समय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए ईरान के पास होर्मुज समुद्री मार्ग में नौवहन को विनियमित और प्रतिबंधित करने का अधिकार है। नेबेंज़िया ने सोमवार को इस मसले पर बोलते हुए सारा इल्जाम ईरान पर मढ़ने की कोशिशों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान को हमलावर के रूप में पेश करना गुमराह करने वाला है। उन्होंने कहा, "पूरी जिम्मेदारी ईरान पर डालने की कोशिश की गयी, मानो ईरान ने ही अपने पड़ोसियों पर हमला किया हो।"
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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