ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद कर दिया तो क्या होगा, विकल्प के तौर पर कितने रास्ते मौजूद?

Mar 14, 2026 08:49 pm ISTNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह बंदी लंबी चली तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा समुद्री तेल व्यापार इसी रास्ते पर निर्भर है। वैकल्पिक समुद्री मार्गों की ओर दुनिया का ध्यान जा रहा है।

ईरान ने अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के तेल व्यापार का एक अहम चोकपॉइंट है। ईरान ने जहाजों पर हमले की धमकी दी है, जिसमें ड्रोन, क्रूज मिसाइल और फाइटर जेट्स का इस्तेमाल हो रहा है। IRGC (इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने अबू मुसा और तुनब द्वीपों पर मिसाइल बैटरी, ड्रोन सुविधाएं और तेज हमले वाली नौकाओं के लिए बंदरगाह स्थापित किए हैं।

ईरान के कुछ अधिकारी कह रहे हैं कि वे इसे पूरी तरह बंद नहीं करेंगे, लेकिन वर्तमान में पश्चिमी जहाजों के लिए यह काफी हद तक प्रतिबंधित है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ रहा है, क्योंकि यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल गुजरता है। इस बंदी के कारण वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई है। खार्ग द्वीप से ईरान का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज से होकर गुजरता था, लेकिन अब जहाज फंस गए हैं और कई पर हमले हो चुके हैं। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिसका असर पेट्रोल, डीजल और एविएशन फ्यूल पर पड़ रहा है।

भारत जैसे देश खाड़ी से बड़ी मात्रा में तेल आयात करते हैं, उनको वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह बंदी लंबी चली तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा समुद्री तेल व्यापार इसी रास्ते पर निर्भर है। वैकल्पिक समुद्री मार्गों की ओर दुनिया का ध्यान जा रहा है। सबसे प्रमुख विकल्प केप ऑफ गुड होप है, जहां जहाज अफ्रीका के दक्षिणी सिरे से होकर जाते हैं। यह रास्ता लंबा है और लागत अधिक आती है, लेकिन हाल के रेड सी संकट में भी इसका इस्तेमाल बढ़ा है।

विकल्प के तौर पर क्या है

दूसरा विकल्प रेड सी-स्वेज कैनाल मार्ग है, जो बाब एल-मंदब जलडमरूमध्य से होकर यूरोप तक जाता है। यह तेज है लेकिन संकीर्ण होने के कारण असुरक्षित माना जाता है। ईरान ने खुद जास्क टर्मिनल (ओमान की खाड़ी में) से तेल निर्यात शुरू किया है, जो होर्मुज से बाहर है और एक वैकल्पिक निकास के रूप में काम कर सकता है। ये विकल्प वैश्विक व्यापार को बनाए रखने में मदद करेंगे, लेकिन इनसे समय, ईंधन और बीमा लागत बढ़ेगी। लंबे समय तक बंदी बनी रहने पर तेल की कमी और महंगाई बढ़ सकती है। दुनिया को अब ऊर्जा सुरक्षा के लिए विविध स्रोतों और मार्गों पर निर्भर होना होगा। यह स्थिति ईरान-अमेरिका तनाव को और गहरा कर रही है, जहां दोनों पक्ष मजबूत रुख अपना रहे हैं।

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पत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।

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