ट्रंप के सीजफायर पर ईरान को नहीं भरोसा, IRGC बोली- ट्रिगर पर ही है हाथ

Apr 08, 2026 05:47 pm ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अस्थायी सीजफायर की वजह से थम गया है। ट्रंप द्वारा घोषित किए गए इस सीजफायर पर आईआरजीसी ने अपना अविश्वास जताया है। ईरान की तरफ से कहा गया है कि भले ही दो सप्ताह का सीजफायर हुआ है, लेकिन उनका हाथ ट्रिगर पर ही है।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब अस्थायी सीजफायर के जरिए थम गया है। लेकिन दोनों ही देशों के बीच में भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है। सीजफायर की घोषणा के बाद मंगलवार को आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि उन्हें अमेरिका के वादों पर कोई भरोसा नहीं है। भले ही दो सप्ताह के युद्धविराम का समझौता हुआ है, लेकिन अभी भी उनका हाथ ट्रिगर पर ही है।

ट्रंप द्वारा घोषित सीजफायर के बाद ईरानी सेना की तरफ से मंगलवार को बयान जारी करके, इस समझौते पर अविश्वास जताया। टेलीग्राम चैनल पर जारी बयान में कहा गया, "ईरान के राष्ट्र के समर्पित गार्ड, सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर आयातुल्लाह सैय्यद मोजतबा खामेनेई के आदेशों का पालन कर रहे हैं। और उनका हाथ ट्रिगर पर है।"

दुश्मन हमेशा धोखेबाज, गल्फ देश सहयोग खत्म करें: IRGC

पश्चिम एशिया में जारी जंग में ईरान के साथ-साथ खाड़ी देशों ने भी काफी नुकसान उठाया है। ईरान की तरफ से इस युद्ध की शुरुआत से ही गल्फ देशों को अमेरिका का सहयोग करने को लेकर चेतावनी जारी की जाती रही है। ईरान ने अमेरिकी हमलों का बदला लेने के लिए खाड़ी देशों के ऊपर भी हमला किया। अब सीजफायर के बाद ईरानी सेना ने एक बार फिर से खाड़ी देशों को चेतावनी और सलाह दी है। जारी बयान में आईआरजीसी ने कहा, "दुश्मन हमेशा से धोखेबाज रहा है, और हमें उसके वादों पर कोई भरोसा नहीं है। हम हर आक्रामकता का जवाब और बड़े स्तर पर देंगे।" गल्फ देशों को चेतावनी देते हुए ईरानी सेना ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र से अमेरिकी सेना को बाहर निकाल देना चाहिए और सभी क्षेत्रीय देशों को वाशिंगटन के साथ सहयोग को खत्म कर देना चाहिए।

सीजफायर पर क्या हाल?

28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले के साथ शुरू हुए पश्चिम एशिया का युद्ध दो सप्ताह के सीजफायर के साथ रुक गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरानी सभ्यता को मिटा देने की धमकियों से अंतिम समय में पीछे हटने के बाद ईरान, अमेरिका और इजराइल दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। फिलहाल समझौते की शर्तों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। यह भी अभी पता नहीं है कि क्या इससे स्थायी शांति स्थापित हो सकती है, क्योंकि दोनों पक्षों ने शर्तों के संबंध में बिल्कुल अलग-अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं।

युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ईरान की ओर से मिसाइल हमले की सूचना दी, और कुवैत की सेना ने कहा कि उसकी सेना ड्रोन हमलों का जवाब दे रही है। वहीं, ईरान ने कहा कि उसकी एक तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने समझौते को "एक नाजुक युद्धविराम" बताया।

ईरान ने कहा कि इस समझौते से उसे होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की नई व्यवस्था को औपचारिक रूप देने की अनुमति मिल जाएगी, लेकिन समझौते की शर्तें स्पष्ट नहीं हैं। यह भी ज्ञात नहीं है कि कोई अन्य देश इस शर्त पर सहमत है या नहीं। पाकिस्तान, जिसने समझौते में मध्यस्थता करने में मदद की, और अन्य देशों ने कहा कि वे लेबनान में लड़ाई रोक देंगे, जहां इजराइल ने ईरान समर्थित हिजबुल्लाह आतंकवादी समूह के खिलाफ जमीनी आक्रमण शुरू किया है। इजराइल ने कहा कि वह हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले जारी रखेगा।

युद्धविराम की घोषणा के बाद ईरान की राजधानी की सड़कों पर सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों ने ''अमेरिका मुर्दाबाद, इजराइल मुर्दाबाद, समझौता करने वाले मुर्दाबाद!'' के नारे लगाए। आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश की लेकिन वे लगातार नारे लगाते रहे। उन्होंने सड़क पर अमेरिकी और इजराइल के झंडे भी जलाए।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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