युद्ध के बीच जन विद्रोह की आशंका से घिरा ईरान? 'कप डिजाइन' की वजह से कई फैके बैन

Upendra Thapak एएफपी
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अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध में उलझे ईरान की इस्लामिक सरकार ने देश में कई कैफेस पर बैन लगा दिया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के खिलाफ कपों पर डिजाइन बनाई है। हालांकि, इस कैफे चैन के मालिकों ने इससे इनकार किया है।

युद्ध के बीच जन विद्रोह की आशंका से घिरा ईरान? 'कप डिजाइन' की वजह से कई फैके बैन

iran war update: अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध में उलझा ईरान अब जनता के ऊपर और भी ज्यादा सख्ती दिखा रहा है। ईरानी अधिकारियों ने राजधानी तेहरान में एक लोकप्रिय कैफे चैन को बंद करने का आदेश दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आदेश के पीछे की वजह इस कैफे द्वारा डिजाइन किए गए नए कपों को बताया गया हैं। दावा है कि नए कपों को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद डिजाइन किया गया है। ईरानी अधिकारियों ने इसे पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई की हत्या से जोड़कर देखा और पूरे कैफै चैन पर बैन लगा दिया।

ईरान के बाहर स्थिति फारसी भाषी मीडिया के मुताबिक इस्लामिक सत्ता ने 'लैमिज कैफे चैन' को बैन कर दिया गया है। क्योंकि उन्होंने कपों के ऊपर 'खाली कुर्सी' का चित्र बनाया था। ईरानी अधिकारियों को जब इस बात की जानकारी मिली, तो उन्होंने इस खाली कुर्सी वाले डिजाइन को खामेनेई की मौत और नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने न आए की घटना से जोड़कर देखा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले के इस्लामिक गणराज्य के न्यायालय में ले जाया गया। यहां पर मौजूद जजों ने इसे बंद करने का आदेश दे दिया। ईरानी न्यूज एजेंसी तसनीम और मेहर ने दावा किया है कि कैफे ने अपने कप पर 'शहीद इमाम के खिलाफ डिजाइन' बनाया था। यहां पर शहीद इमाम का मतलब अली खामेनेई से है।

कैफे मालिकों ने दी सफाई

ईरानी अधिकारियों द्वारा बंद किए जाने से पहले कैफे ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इस मामले पर पूरी सफाई भी पेश की थी। उन्होंने दावा किया कि कैफे हर साल नवरोज (एक त्योहार) को मौके पर नए कप डिजाइन करता है। इसका राजनीति से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा, "नई डिजाइन के साथ बनाए गए इन कप्स का हालिया घटनाओं से कोई संबंध नहीं है। इनके डिजाइन को काफी पहले मंजूरी दी जा चुकी थी।

बता दें, इस कैफे चैन के पूरे ईरान में करीब दो दर्जन कैफे हैं। इनमें से ज्यादातर राजधानी तेहरान और बड़े शहरों में मौजूद हैं। अभी फिलहाल तेहरान में मौजूद इसकी शाखाओं को बंद कर दिया गया है।

क्यों खौफ में है ईरान?

अमेरिका और इजरायल के हमले के पहले ईरान में खामेनेई सरकार के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन हुआ था। उसके पहले 2022 में महिसा अमीनी की हत्या के बाद से ही लगातार छोटे-छोटे आंदोलन होते रहे हैं। ऐसे में ईरान सरकार लगातार इन कैफे्स पर नजर रखे हुए है। ये कैफे कई बार महिलाओं के ड्रेस कोड जैसे इस्लामिक नियमों के पालन में कथित ढिलाई के कारण और जनवरी 2026 में धार्मिक शासन के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान भी प्रशासन की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं।

अमेरिका और इजरायल के राष्ट्र प्रमुखों द्वारा भी लगातार ईरान की जनता से सड़कों पर उतरने और सत्ता को अपने हाथों में लेने की अपील की जा रही है। ऐसे में ईरान किसी भी तरह के विद्रोह की आशंका को दबाने की कोशिश करता हुआ नजर आ रहा है। इसी क्रम में खाली कुर्सी वाले इन कपों की वजह से कैफे पर कार्रवाई हुई है।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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