ईरान पर हमले में अमेरिका की भी एक हार, डोनाल्ड ट्रंप का पूरा नहीं हुआ मकसद: एक्सपर्ट
ब्रह्म चेलानी ने लिखा है कि तेहरान में सिर कलम करने के बाद भी सरकार गिरने की कोशिश नाकाम रही है। US डिफेंस सेक्रेटरी हेगसेथ ने अपने ही प्रेसिडेंट के उलट अब दावा किया है कि ईरान के खिलाफ जंग का मकसद सरकार बदलना नहीं है।

शनिवार (28 फरवरी) को ईरान पर किए गए इजरायल और अमेरिका के हमले में भले ही वहां के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अफसरों की मौत हो गई हो लेकिन ईरान में सत्ता परिवर्तन होता फिलहाल नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में ईरान पर हमलों के बाद बदलते घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया की स्थिति को और जटिल बना दिया है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अब कहा है कि अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन का मकसद ईरान में शासन परिवर्तन (Regime Change) नहीं है।
बता दें कि उनसे पहले राष्ट्रपति ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि वह ईरान से इस्लामिक सत्ता उखाड़ फेंकना चाहते हैं। एक दिन पहले भी ट्रंप ने ईरानियों से आह्वान किया था कि यही सही समय है कि वहां के लोग शासन में बदलाव के लिए उठ खड़े हों। ऐसे में पीट हेगसेथ का ताजा बयान पहले दिए गए संकेतों से अलग माना जा रहा है। वरिष्ठ भू-राजनीतिकार और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) में रणनीतिक अध्ययन के प्रोफेसर ब्रह्म चेलानी के मुताबिक, अमेरिका का नया स्टैंड ईरान के मुद्दे पर ट्रंप की हार को दर्शाता है।
ब्रह्म चेलानी ने क्या लिखा?
सोशल मीडिया एक्स पर ब्रह्म चेलानी ने लिखा है, "तेहरान में सिर कलम करने के बाद भी सरकार गिरने की कोशिश नाकाम रही है। U.S. डिफेंस सेक्रेटरी हेगसेथ ने अपने ही प्रेसिडेंट के उलट अब दावा किया है कि ईरान के खिलाफ जंग का मकसद सरकार बदलना नहीं है।" उन्होंने आगे लिखा है, सरेंडर करने के बजाय, US-इजरायल के सिर कलम करने वाले हमलों ने ईरान में बदले की भावना को और बढ़ा दिया है। ईरान अब बदला लेने के लिए तैयार है, भले ही उसे अमेरिका और इजरायल की मिली-जुली ताकत का सामना करना पड़े।"
ट्रंप के नियंत्रण से बाहर होता युद्ध?
चेलानी ने लिखा है कि ईरान के आसमान पर अमेरिका और इजरायल का कब्ज़ा हो सकता है, लेकिन जैसा कि ईरान की बढ़ती जवाबी कार्रवाई से पता चलता है, हवाई दबदबा और बढ़ते दबदबे का मतलब अलग-अलग है। उन्होंने लिखा कि ट्रंप ने जंग शुरू की, लेकिन हो सकता है कि अब वह इसके रास्ते को कंट्रोल न कर पाएं। इस पूरे घटनाक्रम में डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका भी चर्चा में है। विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध की शुरुआत भले ही उनके निर्णय से हुई हो, लेकिन अब इसकी दिशा और तीव्रता पर उनका नियंत्रण कमजोर पड़ता दिख रहा है।
‘एयर सुपीरियोरिटी’ बनाम ‘एस्केलेशन डॉमिनेंस’
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के ऊपर हवाई बढ़त (Air Superiority) हासिल कर ली हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे संघर्ष की दिशा पूरी तरह नियंत्रित कर पा रहे हैं। ईरान की जवाबी कार्रवाई यह दिखाती है कि ‘एस्केलेशन डॉमिनेंस’ अभी भी अनिश्चित है।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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