होर्मुज बन गया सबसे बड़ा विवाद, खत्म हुआ US-ईरान का 60 दिनों वाला समझौता; हालात बिगड़े

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ईरान और अमेरिका के बीच हुआ 14 सूत्रीय समझौता 60 दिन की अवधि पूरी होने के साथ ही खत्म हो गया है। वहीं अब ओमान को लेकर भी तनाव बढ़ रहा है। ईरान ने ओमान से समझौता करने को कहा तो डोनाल्ड ट्रंप आगबबूला हो गए।

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ईरान और अमेरिका के बीच हुए एमओयू की समयसीमा खत्म

अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुआ 14 सूत्री समझौता ज्ञापन (एमओयू) सोमवार को 60 दिन की अवधि पूरी होने के साथ समाप्त हो गया, लेकिन गतिरोध अब भी बरकरार है। बल्कि दोनों देशों के बीच दूरियां पहले से भी अधिक बढ़ी हुई नजर आ रही हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 14 सूत्री एमओयू पर सहमति बनी थी। दोनों पक्षों ने सैन्य कार्रवाई तत्काल और स्थायी रूप से रोकने पर सहमति जताई थी। इसमें लेबनान भी था। अमेरिका को 30 दिनों के भीतर नाकेबंदी खत्म करनी थी।

इन बातों पर बनी थी सहमति

अंतिम समझौता होने के बाद ईरान के आसपास से अमेरिकी बलों को हटाने और ईरान को 300 अरब डॉलर का पैकेज तैयार करने की बात कही गई थी। अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध हटाने, तेल निर्यात के लिए छूट देने और विदेशों में जमा रकम तक पहुंच की अनुमति पर सहमति जताई थी। ईरान को होर्मुज से बारूदी सुरंगें हटानी थीं और 60 दिनों तक पोतों को बिना शुल्क सुरक्षित रास्ता देना था। तेहरान ने परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करने पर प्रतिबद्धता भी जताई थी।

होर्मुज बना सबसे बड़ा विवाद

समझौते के अनुच्छेद-5 में होर्मुज से वाणिज्यिक पोतों की सुरक्षित आवाजाही की बात थी, लेकिन होर्मुज के भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत की भी बात कही गई थी। यहीं से विवाद शुरू हुआ। ओमान ने अमेरिका के समर्थन से ऐसा समुद्री मार्ग जारी किया, जिसमें पोतों को उसके तट के करीब से गुजरना था। दूसरी ओर, ईरान पहले ही ऐसा नक्शा जारी कर चुका था, जिसमें पोतों को उसके तट के करीब से गुजरना था और ओमान की ओर के मार्ग को प्रतिबंधित बताया गया था। जून के अंत में ओमान वाले मार्ग से गुजरने वाले कई पोतों को निशाना बनाया गया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर फिर हमले शुरू कर दिए, जो दो सप्ताह तक चले।

ईरान बोला, ओमान से बातचीत अंतिम चरण में

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोमवार को कहा कि ईरान-ओमान में होर्मुज से पोतों के आवागमन मार्ग के नक्शे को लेकर समझ बनी है। उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी। हालांकि, प्रस्तावित व्यवस्था में पोत ईरान के करीब से होर्मुज में प्रवेश करेंगे और ओमान के करीब से निकलेंगे।

समझौते की राह में ओमान आया तो बम बरसाएंगे

ट्रंप ने ईरान के साथ होर्मुज को लेकर समझौते में ओमान के हस्तक्षेप पर उसे बमबारी की धमकी दी है। फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अगर ओमान ईरान के साथ समझौते की राह में आता है तो अमेरिका उस पर बमबारी करेगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान को भी आत्मसमर्पण कर देना चाहिए।

लेबनान समझौता भी फंसा

● एमओयू के अनुच्छेद-1 में मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने और लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता की बात कही गई थी, लेकिन इजरायल का स्पष्ट उल्लेख नहीं था।

● इजरायल लेबनान के दक्षिणी हिस्से में मौजूद है और वहां लगातार हमले करता रहा है। ईरान का कहना था कि एमओयू के तहत लेबनान में इजरायल की ओर से सैन्य कार्रवाई भी पूरी तरह रुकनी चाहिए। हालांकि, इजरायल ने इस व्याख्या को स्वीकार नहीं किया।

● एमओयू के अनुच्छेद-6 में ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर की योजना तैयार करने की बात भी कही गई थी, लेकिन इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि यह राशि कौन देगा और यह कैसे खर्च होगी। (हिन्दुस्तान प्रिंट के सहयोग से)

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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