हमले रुके, तभी हमारी तोपें भी शांत रहेंगी; अपनी शर्तों पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को राजी हुआ ईरान
इस पूरे समझौते की पटकथा तैयार करने में पाकिस्तान ने मुख्य सूत्रधार की भूमिका निभाई है। ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है, जो इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता का मुख्य आधार होगा।

मिडिल ईस्ट को दहला देने वाले 40 दिनों के खूनी संघर्ष के बाद बुधवार तड़के दुनिया ने राहत की सांस ली है। अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के ऐतिहासिक संघर्ष विराम (Ceasefire) पर सहमति बन गई है। इस समझौते के तहत ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को सीमित आवाजाही के लिए खोलने का प्रस्ताव दिया है। दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत 10 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू होगी।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस कूटनीतिक पहल की पुष्टि की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यदि ईरान के खिलाफ हमलों को पूरी तरह रोक दिया जाता है, तो हमारे शक्तिशाली सशस्त्र बल भी अपनी रक्षात्मक कार्रवाइयां बंद कर देंगे।" अब्बास अराघची ने आगे बताया कि समझौते के तहत अगले दो हफ्तों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन यह आवाजाही ईरानी सशस्त्र बलों के साथ समन्वय के अधीन होगी।
आपको बता दें कि वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, जिसे ईरान ने हालिया संघर्ष के दौरान बाधित कर दिया था।
10-सूत्रीय एजेंडा
इस पूरे समझौते की पटकथा तैयार करने में पाकिस्तान ने मुख्य सूत्रधार की भूमिका निभाई है। ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है, जो इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता का मुख्य आधार होगा।
इन मुद्दों पर होगी बात:
पहले की तरह खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज।
ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील।
क्षेत्रीय सैन्य अड्डों से अमेरिकी सेना की वापसी।
इजरायल-ईरान संघर्ष में भविष्य की कार्ययोजना।
'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने इस युद्धविराम को अपनी स्वीकृति दे दी है। हालांकि वे अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, लेकिन इस फैसले को उनके नेतृत्व की पहली बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। इस समझौते के पीछे चीन का भी अंतिम समय में दबाव बनाया। चीन ने वैश्विक आर्थिक मंदी और ऊर्जा संकट के डर से दोनों पक्षों को लचीला रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया। ईरान को डर था कि यदि अमेरिका ने उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया, तो देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।
भले ही संघर्ष विराम लागू हो गया है, लेकिन ईरान ने इसे अपनी जीत बताया है और कड़े तेवर बरकरार रखे हैं। ईरानी सुरक्षा परिषद ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि यह युद्ध का अंत नहीं है। बयान में कहा, "हमारी उंगलियां अभी भी ट्रिगर पर हैं। दुश्मन की किसी भी छोटी सी चूक का जवाब पूरी ताकत और विनाशकारी हमले के साथ दिया जाएगा।"
इस्लामाबाद पर टिकी नजरें
वाइट हाउस के एक अधिकारी ने संकेत दिया है कि संघर्ष विराम औपचारिक रूप से तभी सफल माना जाएगा जब तेल का आवागमन सुचारू रूप से शुरू हो जाएगा। इस्लामाबाद में होने वाली यह वार्ता 15 दिनों तक चलने की उम्मीद है, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
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