समंदर के अंदर से ताक-झांक कर रहा था चीन, जाल में फंसते ही खुल गया ड्रैगन का राज!

Devendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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इंडोनेशिया के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लोम्बोक स्ट्रेट के निकट एक मछुआरे के जाल में चीन का एक अंडरवॉटर ड्रोन फंस गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना सोमवार को हुई, जब मछुआरा बाली और लोम्बोक द्वीप के बीच के जलमार्ग में मछली पकड़ने के जाल डाल रहा था।

समंदर के अंदर से ताक-झांक कर रहा था चीन, जाल में फंसते ही खुल गया ड्रैगन का राज!

इंडोनेशिया के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लोम्बोक स्ट्रेट के निकट एक मछुआरे के जाल में चीन का एक अंडरवॉटर ड्रोन फंस गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना सोमवार को हुई, जब मछुआरा बाली और लोम्बोक द्वीप के बीच के जलमार्ग में मछली पकड़ने के जाल डाल रहा था। मछुआरे ने पानी में 'टॉरपीडो जैसी' आकृति वाली एक संदिग्ध वस्तु देखी। शक होने पर उसने उसे किनारे पर खींच लिया और तुरंत स्थानीय अधिकारियों को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने वस्तु की प्रारंभिक जांच की, जिसमें विस्फोटक और रेडियोधर्मी पदार्थों की तलाश की गई। जांच में कोई तत्काल खतरा नहीं पाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फंसी हुई वस्तु लगभग 3.7 मीटर (12 फीट) लंबी और 0.7 मीटर व्यास वाली बेलनाकार है। इस पर चीन शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन (CSIC) का लोगो और चीनी अक्षर साफ दिखाई दे रहे हैं। CSIC चीन की प्रमुख जहाज निर्माण कंपनियों में शामिल है, जो पनडुब्बियों, नौसैनिक जहाजों और पानी के नीचे निगरानी उपकरणों का विकास करती है। स्थानीय पुलिस के अनुसार, यह उपकरण समुद्री अवलोकन या समुद्री सर्वेक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाले ड्रोन जैसा प्रतीत होता है। इसे लोम्बोक स्थित मातरम नौसैनिक अड्डे पर भेज दिया गया है, जहां विशेषज्ञ इसकी उत्पत्ति, तकनीकी क्षमताओं और कार्यप्रणाली की गहन जांच कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस घटना से इंडोनेशिया की राष्ट्रीय सुरक्षा या समुद्री संप्रभुता प्रभावित हुई है।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब लोम्बोक स्ट्रेट पर अंतरराष्ट्रीय नजर रखी जा रही है। यह गहरा जलमार्ग प्रशांत महासागर और हिंद महासागर को जोड़ता है तथा पनडुब्बियों और बड़े नौसैनिक जहाजों के आवागमन के लिए आदर्श माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया AUKUS समझौते के तहत परमाणु-संचालित पनडुब्बियां प्राप्त करने जा रहा है, जिसके लिए यह मार्ग अहम होगा। गौरतलब है कि इंडोनेशिया के पड़ोसी देश फिलीपींस में भी पहले चीनी मानवरहित पानी के नीचे चलने वाले वाहन (UUV) पाए जा चुके हैं। हालांकि इंडोनेशिया दक्षिण चीन सागर विवाद का सीधा पक्षकार नहीं है, लेकिन वह चीन के समुद्री विस्तारवादी दावों की आलोचना करता रहा है और अपने अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में चीनी जहाजों की गतिविधियों का विरोध करता है।

दूसरी ओर रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही ये ड्रोन वैज्ञानिक अनुसंधान या समुद्री सर्वेक्षण के लिए हों, लेकिन इनके जरिए एकत्र किया गया डेटा सैन्य और रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। इंडोनेशियाई नौसेना अब इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि समुद्र की गहराई में चीन का यह अंडरवॉटर ड्रोन आखिर क्या कर रहा था?

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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