इंडियन बॉस ने भारतीयों की छीन ली नौकरी, क्या अमेरिका में H1-B वीजा वालों को किया जा रहा टारगेट

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आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो साल 2026 में माइक्रोसॉफ्ट को एच-1बी वीजा के तहत 2,273 विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की मंजूरी मिली है। भारत के पेशेवर इस वीजा कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल हैं।

इंडियन बॉस ने भारतीयों की छीन ली नौकरी, क्या अमेरिका में H1-B वीजा वालों को किया जा रहा टारगेट

अमेरिका के H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर विवाद तेज हो गया है। इस बार बहस की वजह माइक्रोसॉफ्ट की ओर से बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी करना है। इसे लेकर एच-1बी वीजा के तहत विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को लेकर उठे सवाल हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने हाल ही में दुनिया भर में करीब 4,800 कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की, जो उसके कुल कार्यबल का लगभग 2.1 प्रतिशत है। इनमें से करीब 3,200 नौकरियां कंपनी के एक्सबॉक्स गेमिंग डिवीजन से गईं। कंपनी का कहना है कि यह फैसला कारोबार को अधिक लाभदायक बनाने के लिए किया गया।

भारतीय मूल की आशा शर्मा को इसी साल फरवरी में एक्सबॉक्स का CEO बनाया गया। उन्होंने भी कर्मचारियों को भेजे गए मैसेज में कंपनी की वित्तीय स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताया। छंटनी के बाद रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की है। उनका आरोप है कि बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को हटाकर कम लागत वाले विदेशी कर्मचारियों (खासकर भारत से आने वाले पेशेवरों) को नौकरी दे रही हैं। मूर ने कहा कि H-1B कार्यक्रम का दुरुपयोग किया जा रहा है और इसे बंद करने का समय आ गया है।

एक्सबॉक्स में भर्ती को लेकर उठे सवाल

रिपब्लिकन सांसद ने दावा किया कि माइक्रोसॉफ्ट ने एक्सबॉक्स में हजारों अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने के बाद भारत से कर्मचारियों को H-1B वीजा पर लाने के लिए हजारों आवेदन किए। मूर ने इसे अमेरिकी नौकरियों के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि इससे देश के युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने आरोप लगाया कि अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त किया जा रहा है। कुछ यूजर्स ने भारतीय मूल की CEO आशा शर्मा पर भी निशाना साधा और दावा कि अमेरिकी कर्मचारियों को हटाया जा रहा है। हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया है।

माइक्रोसॉफ्ट का क्या है तर्क

आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 में माइक्रोसॉफ्ट को एच-1बी वीजा के तहत 2,273 विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की मंजूरी मिली है। भारत के पेशेवर इस वीजा कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल हैं। वित्त वर्ष 2024 में स्वीकृत एच-1बी आवेदनों में उनकी हिस्सेदारी 72 प्रतिशत से अधिक रही थी। माइक्रोसॉफ्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि छंटनी का फैसला केवल कारोबारी जरूरतों के आधार पर लिया गया है, न कि किसी कर्मचारी की वीजा स्थिति को देखते हुए।

Niteesh Kumar

लेखक के बारे में

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पत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।

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