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भारत बनेगा अब रॉकेट सुपरपावर, रूस देगा RD-191M इंजन का पूरा राज; जानें क्या होगा फायदा

भारत बनेगा अब रॉकेट सुपरपावर, रूस देगा RD-191M इंजन का पूरा राज; जानें क्या होगा फायदा

संक्षेप:

रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के महानिदेशक दिमित्री बकनोव ने एक टेलीविजन चैनल को बताया कि भारत के साथ रॉकेट इंजन का सौदा होने वाला है। उन्होंने मानव अंतरिक्ष उड़ान और अंतरिक्ष स्टेशन के विकास में भी सहयोग की संभावना जताई।

Dec 04, 2025 05:33 pm ISTDevendra Kasyap वार्ता, मॉस्को
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रूस अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के साथ अपने संबंध मजबूत करते हुए अपने सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन आरडी-191 की आपूर्ति करने और इसके निर्माण की तकनीक भारत को देने के लिए तैयार है। यह कदम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आज (गुरुवार) से शुरू हो रही दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान इस बेहद खास सौदे की घोषणा हो सकती है।

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रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के महानिदेशक दिमित्री बकनोव ने एक टेलीविजन चैनल को बताया कि भारत के साथ रॉकेट इंजन का सौदा होने वाला है। उन्होंने मानव अंतरिक्ष उड़ान और अंतरिक्ष स्टेशन के विकास में भी सहयोग की संभावना जताई। हालांकि बकानोव ने इंजन के प्रकार का उल्लेख नहीं किया, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि यह एक सेमी-क्रायोजेनिक इंजन होगा।

बता दें कि दोनों देशों के बीच रॉकेट इंजन सौदे पर पिछले कुछ वर्षों से बातचीत चल रही थी। यह रूस और भारत के बीच दूसरा प्रमुख सौदा होगा, इससे पहले ब्रह्मोस मिसाइल का संयुक्त उद्यम सफलतापूर्वक चल रहा है। यह दूसरी बार होगा जब भारत रूस से रॉकेट इंजन खरीदेगा। पहले भारत ने इसरो के जीएसएलवी रॉकेट के शुरुआती चरण के लिए सात क्रायोजेनिक इंजन खरीदे थे, लेकिन अमेरिकी भू-राजनीतिक दबाव के कारण रूस ने बाद में आपूर्ति रोक दी थी और कोई तकनीक हस्तांतरण नहीं किया गया था।

भारत अपने मौजूदा भारी-लिफ्ट रॉकेट एलवीएम3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3) में आरडी-191 सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग करना चाहता है। वर्तमान में एलवीएम3 की पेलोड क्षमता भूस्थिर कक्षा के लिए केवल चार टन है। इसरो इस क्षमता को पांच टन तक बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। इसके लिए शक्तिशाली क्रायोजेनिक इंजन के साथ एलवीएम3 के दूसरे चरण के तरल इंजन को सेमी-क्रायोजेनिक इंजन से बदला जाएगा। ये संवर्द्धन पेलोड क्षमता को बढ़ाएंगे और न्यूस्पेस इंडिया के माध्यम से वाणिज्यिक पेशकशों के लिए रॉकेट को तैयार करेंगे।

हालांकि इसरो पिछले कई वर्षों से तरल ऑक्सीजन और केरोसिन संचालित अपना स्वयं का एसई/एससीई 2,000 सेमी-क्रायोजेनिक इंजन विकसित करने पर काम कर रहा है, लेकिन इसकी प्रगति धीमी रही है। भारत को चार टन से अधिक वजन वाले संचार उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने के लिए विदेशी एजेंसियों को भारी रकम चुकानी पड़ती है। साथ ही, भारत अपने एलवीएम3 के साथ भारी संचार उपग्रहों को लॉन्च करके शुल्क अर्जित करने का अवसर भी खो रहा है।

रूस का थ्रॉटलेबल आरडी-191 सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन, एलवीएम3 को उच्च पेलोड ले जाने के लिए आवश्यक बल दे सकता है। उम्मीद है कि रूसी इंजन और उन्नत इसरो क्रायोजेनिक इंजन के संयोजन से एलवीएम3 जीईओ तक सात टन पेलोड ले जाने में सक्षम होगा। भारत की मनुष्य को चंद्रमा पर भेजने और अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की महत्वाकांक्षाएं हैं, जिसके लिए वास्तव में शक्तिशाली भारी-लिफ्ट रॉकेट की आवश्यकता होगी।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap
देवेन्द्र कश्यप, लाइव हिंदुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर। पटना से पत्रकारिता की शुरुआत। महुआ न्यूज, जी न्यूज, ईनाडु इंडिया, राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे बड़े संस्थानों में काम किया। करीब 11 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत। MCU भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई। पटना व‍िश्‍वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क पर सेवा दे रहे हैं। और पढ़ें

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