केवल हम नहीं, भारत की जद में पश्चिमी देशों की राजधानियां; मिसाइल प्रोग्राम से डरा पाकिस्तान!

लाइव हिन्दुस्तान, इस्लामाबाद
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पाकिस्तान के पूर्व रक्षा अधिकारी ने दावा किया है कि भारत का लंबी दूरी का मिसाइल कार्यक्रम केवल पाकिस्तान या चीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पश्चिमी देशों तक अपनी सामरिक पहुंच बनाकर 'ग्लोबल पावर' बनना है।

केवल हम नहीं, भारत की जद में पश्चिमी देशों की राजधानियां; मिसाइल प्रोग्राम से डरा पाकिस्तान!

पाकिस्तान के एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि भारत का लंबी दूरी का मिसाइल विकास कार्यक्रम दक्षिण एशिया से परे उसकी महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है। राष्ट्रीय कमान प्राधिकरण के सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) मजहर जमील ने ये टिप्पणियां 'सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक स्टडीज' (सीआईएसएस) द्वारा आयोजित पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कीं।

सामरिक योजना प्रभाग के पूर्व महानिदेशक जनरल जमील ने दावा किया, ''भारत के सामरिक बल कार्यक्रम की दिशा केवल पाकिस्तान या चीन तक सीमित नहीं है, जिसमें अंतरमहाद्वीपीय मारक क्षमता वाली मिसाइल प्रणालियां भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य भारत को ऐसी वैश्विक परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित करना है, जो प्रमुख पश्चिमी देशों की राजधानियों तक को अपनी सामरिक पहुंच के दायरे में ला सके।''

उन्होंने पश्चिमी सरकारों से भारत के सैन्य आधुनिकीकरण पर ध्यान देने का आग्रह किया। जमील ने यह भी कहा कि मई में भारत के साथ संघर्ष के दौरान पाकिस्तान का संयम ''एक सोचा-समझा और सुविचारित फैसला'' था। उन्होंने दावा किया कि भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब ''निर्णायक और व्यापक'' होगा।

भारत के पास कौन-कौन सी लंबी दूरी की ताकतवर मिसाइले हैं?

भारत ने अपनी सामरिक सुरक्षा और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए लंबी दूरी की कई मारक मिसाइलें विकसित की हैं। भारत का फोकस अब लंबी दूरी और कई वॉरहेड ले जाने में सक्षम मिसाइलों पर है, जो चीन के सुदूर हिस्सों और उससे आगे तक मार कर सकती हैं।

अग्नि-5 (Agni-V)

यह भारत के शस्त्रागार की सबसे घातक और मारक मिसाइल है। तकनीकी रूप से इसे इंटरमीडिएट-रेंज/इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) माना जाता है। 5,500 किलोमीटर (आधिकारिक), लेकिन रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इसकी वास्तविक क्षमता 8,000 किलोमीटर तक है। यह बीजिंग और शंघाई सहित पूरे चीन को कवर करती है।

2024 में 'मिशन दिव्यास्त्र' के तहत भारत ने इस मिसाइल में MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) तकनीक का सफल परीक्षण किया था। इसका मतलब है कि एक ही अग्नि-5 मिसाइल अपने साथ कई परमाणु वॉरहेड ले जा सकती है और अलग-अलग शहरों या लक्ष्यों पर एक साथ सटीक हमला कर सकती है। यह सड़क मार्ग से ले जाई जा सकती है और 'कनस्तर' (Canister) से लॉन्च होने के कारण इसे लॉन्च के लिए कुछ ही मिनटों में तैयार किया जा सकता है।

अग्नि-4 (Agni-IV)

अग्नि-5 से पहले यह भारत की सबसे लंबी दूरी की मिसाइल थी और आज भी स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC) का अहम हिस्सा है। इसकी रेंज लगभग 4,000 किलोमीटर है। यह 20 टन वजनी यह मिसाइल अत्याधुनिक एवियोनिक्स, रिंग लेजर जायरोस्कोप और पांचवीं पीढ़ी के ऑन-बोर्ड कंप्यूटर से लैस है। यह भी परमाणु हथियार ले जाने में पूरी तरह सक्षम है।

अग्नि-6 (Agni-VI) — विकास के उन्नत चरण में

यह भारत का आगामी ब्रह्मास्त्र है, जो पूरी तरह से अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) होगी। हाल ही में (जून 2026) इसके संभावित परीक्षण को लेकर ओडिशा तट पर बड़े पैमाने पर अलर्ट भी देखा गया था। अनुमानित रेंज- 8,000 से 12,000 किलोमीटर के बीच है। यह मिसाइल 10 से ज्यादा परमाणु वॉरहेड एक साथ ले जाने (MIRV) और हवा में दिशा बदलने (MaRV) में सक्षम होगी। यह अमेरिका के THAAD और रूस के S-500 जैसे उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने के लिए डिजाइन की जा रही है।

K-सीरीज: पनडुब्बी से दागी जाने वाली मिसाइलें (SLBM)

भारत की 'सेकंड स्ट्राइक' (दुश्मन के हमले के बाद समुद्र के नीचे से पलटवार) क्षमता K-सीरीज की मिसाइलों पर निर्भर है। इन्हें अरिहंत श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियों से दागा जाता है।

K-4: इसकी रेंज 3,500 किलोमीटर है। पानी के भीतर से फायर होने के कारण इसे ट्रैक करना दुश्मन के लिए बेहद मुश्किल होता है।

K-5 और K-6 (निर्माणाधीन): भारत अपनी पनडुब्बियों के लिए और भी लंबी दूरी की मिसाइलें बना रहा है। K-5 की रेंज 5,000 किलोमीटर और K-6 की रेंज 6,000 से 8,000 किलोमीटर तक होने का अनुमान है।

Amit Kumar

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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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