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4 जून, 2020|11:17|IST

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कोरोना लॉकडाउन पलायन: 24 साल पहले भागे युवक को कोरोना ने पहुंचाया घर

रोजगार के लिए 24 साल पहले घर से भागा युवक अब नौकरी चले जाने के बाद घर आ गया है। इतने साल वह विभिन्न शहरों में मौज मस्ती करता रहा। उसे घर की याद तक नहीं आई।

कोरोना संक्रमण बढ़ा तो उसे अकेले रहने का डर सताने लगा। उसने किसी तरह पास बना लिया और अन्य प्रवासियों की तरह ही अपने गांव पहुंच गया। गांव में आकर उसे किसी ने नहीं पहचाना।

उसने ग्रामीणों के साथ कुछ पुरानी बातें साझा की तो उन्हें उस पर भरोसा होने लगा। इस बात की भनक जब उसकी मां को लगी तो वह भी पहुंच गई। उसने बेटे को देखते ही पहचान लिया।

मां और परिवार का स्नेह मिलने के बाद प्रकाश ने भी आगे का जीवन गांव में बिताने का निर्णय लिया है। वह कुशल श्रमिक है। फिलहाल वह उसी प्राथमिक विद्यालय में क्वारंटाइन है जहां उसने अ आ, क ख और ग सीखी।  

प्रकाश का जन्म कपकोट तहसील के दूरस्थ गांव रमाड़ी में हुआ था। तीन भाइयों में दूसरे नंबर के प्रकाश ने प्राइमरी की शिक्षा राजकीय प्राथमिक विद्यालय रमाड़ी से प्राप्त की।

1995 में उसने इंटर कॉलेज शामा से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। उसके एक साल बाद वह नौकरी की तलाश में बिना किसी को बताए घर से भागकर महानगर की ओर चला गया।

जिसके बाद से उसका घरवालों से किसी प्रकार का संपर्क नहीं रहा। इधर देश में कोरोना महाकारी विकराल रूप लेने लगी। इस बीच प्रवासियों को घर भेजा जाने लगा तो वह भी पास बनाकर घर पहुंच गया।

गांव आकर उसने सबको अपना परिचय दिया। पहले तो लोग विश्वास करने को तैयार नहीं हुए। बात उसके मां बचुली देवी व भाइयों तक पहुंची। उन्हें उसने अपने बचपन की कई बातें बताई।

जिसके बाद परिवार वालों ने उसे पहचाना। पहचान होने के बाद उसे भी बाहरी राज्यों से आए अन्य लोगों के साथ प्राथमिक विद्यालय में बने फेसिलिटी सेंटर में क्वारंटाइन करा दिया गया है। 
 
दिल्ली, मुंबई, हिमांचल व गुजरात में काटे दिन:
बागेश्वर। घर पहुंचने के बाद प्रकाश ने ग्रामीणों को पिछले 24 सालों में बिताए दिनों की जानकारी दी। उसने बताया कि घर से जाने के बाद वह सबसे पहले दिल्ली पहुंचा।

जहां कुछ समय तक मेहनत मजदूरी कर पेट पाला। इसके बाद मुंबई में कई कंपनियों में नौकरी की। जहां से हिमाचल गया। वहां संतरे व सेब की बागवानी सीखी।

इसके बाद वह गुजरात चला गया। वर्तमान में वहीं एक कंपनी में इलेक्ट्रीशियन का काम कर रहा था। अचानक देश में कोरोना बढ़ने लगा तो अपनी चिंता सताने लगी।

जिसके साथ ही घर और घर वालों की याद आ गई। तभी उसने निश्चय कर लिया कि घर लौटूंगा। उन्होंने कहा कि इन सालों में उसने बहुत कुछ खोया है। पिता को भी वह देख नहीं सका।

कहा कि अब बाकी की जिंदगी परिवार वालों के साथ बिताना चाहता है। उसने कहा कि वह गांव में मनरेगा या अन्य कार्यों में मजदूरी कर रोजी रोटी जुटाएगा। 

 

अब नहीं जाने दूंगी बेटे को बाहर: बचुली देवी
बागेश्वर। बेटे के घर पहुंचने से सबसे अधिक खुशी उसकी बूढ़ी मां बचुली देवी को हुई है। उन्होंने बताया कि जब बेटा छोड़कर  चला गया तो बहुत दुख हुआ था। जाने के बाद यह अपनी मां को भी भूल गया।

कहा कि अब वह किसी भी कीमत पर बेटे को अपने से दूर नहीं होने देगी। बाहर क्या रखा है, बेटा यही रहकर मेहनत मजदूरी करेगा। उसके दोनों भाइयों ने भी अब प्रकाश को अपने साथ ही रखने की बात कही है। कहा कि अब भाई भी उनके साथ खेती में हाथ बंटाएगा। 


 

प्रकाश के गांव लौट आने से परिवार बेहद खुश है। अगर वह यहीं रहना चाहेगा तो मनरेगा के तहत उसका जॉब कार्ड बनाया जाएगा। उसे अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भी प्रयास किया जाएगा। 
गणेश कुमार, ग्राम प्रधान, रमाड़ी। 

 

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  • Web Title:man unites with family after 24 years in bageshwar district due to covid 19 amid lockdown 4 due to corona virus pandemic in uttarakhand