आज किया अमेरिकी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन तो नंबर कब आएगा? वेटिंग पीरियड जान चौंक जाएंगे

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अमेरिका में नौकरी के लिए ग्रीन कार्ड का सपना देखने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए चौंकाने वाली खबर सामने आई है। एनएफएपी के विश्लेषण के मुताबिक, जनवरी 2026 या उसके बाद रोजगार-आधारित आवेदन करने वाले भारतीय आवेदकों को ईबी-2 श्रेणी में स्थायी निवास मिलने में 179 साल तक का इंतजार करना पड़ सकता है।

US Green Card
अमेरिकी ग्रीन कार्ड

अगर आप नौकरी या रोजगार के लिए अमेरिका जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है। अमेरिका में स्थायी रूप से बसने और काम करने के लिए रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करना आसान नहीं है। अगर आपको लगता है कि ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने के एक-दो महीने बाद ही यह मिल जाएगा, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। भारतीय पेशेवरों के लिए इसका इंतजार बेहद लंबा हो सकता है। दरअसल, रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड की लंबी कतार के चलते किसी भारतीय पेशेवर को स्थायी निवास हासिल करने में 179 साल तक का समय लग सकता है।

नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) के नए विश्लेषण के अनुसार, आज अमेरिकी रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले भारतीय पेशेवरों, खासकर ईबी-2 श्रेणी के उच्च शिक्षा प्राप्त कर्मचारियों को स्थायी निवास मिलने में 179 साल तक का समय लग सकता है। जनवरी 2026 या उसके बाद आवेदन करने वालों के लिए यह अनुमान लगाया गया है।

लगभग 10 लाख भारतीय कतार में

समस्या भारतीयों के लिए सबसे गंभीर है। वर्तमान में करीब 9,96,599 भारतीय पेशेवर और उनके आश्रित रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा सूची में हैं। यह कुल लंबित आवेदनों का लगभग 79 प्रतिशत है। बता दें कि ग्रीन कार्ड विदेशी नागरिकों को अमेरिका में स्थायी निवास का अधिकार देता है। अस्थायी कार्य वीजा के विपरीत, इसके धारक देश में स्थायी रूप से रह और काम कर सकते हैं। भारतीय पेशेवरों के लिए रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड मुख्य मार्ग माना जाता है।

क्या है कारण?

लंबे इंतजार का सबसे बड़ा कारण रोजगार-आधारित ग्रीन कार्डों की सीमित संख्या और प्रति देश 7 प्रतिशत की सीमा है। अमेरिका हर साल करीब 1,40,000 रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड जारी करता है। किसी एक देश के नागरिकों को कुल संख्या का 7 प्रतिशत से ज्यादा नहीं मिल सकता। भारत से बड़ी संख्या में आवेदकों के कारण कतार बहुत लंबी हो गई है। एनएफएपी के अनुसार, हर भारतीय आवेदक को 179 साल नहीं लगेंगे। प्रतीक्षा अवधि श्रेणी और कतार में स्थिति पर निर्भर करती है। अनुमान है कि ईबी-1 में करीब पांच साल, ईबी-2 में 179 साल और ईबी-3 में 38 साल तक का इंतजार हो सकता है।

तीन श्रेणियां क्या हैं?

  • ईबी-1: विज्ञान, कला, व्यवसाय, खेल में असाधारण क्षमता वाले लोग, उत्कृष्ट प्रोफेसर-शोधकर्ता और कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उच्च अधिकारी
  • ईबी-2: उच्च डिग्री वाले पेशेवर या ऐसे व्यक्ति जिनका काम अमेरिकी राष्ट्रीय हित में माना जाता है

-ईबी-3: स्नातक डिग्री धारक पेशेवर, कुशल श्रमिक और अन्य श्रमिक

बता दें कि भारतीय पेशेवरों में ईबी-2 श्रेणी में लंबित आवेदनों की संख्या सबसे अधिक है।

कैसे बढ़ा बैकलॉग?

दरअसल, एक दशक से अधिक समय से लंबित मामले बढ़ते जा रहे हैं। एनएफएपी ने वित्तीय वर्ष 2016 का उदाहरण दिया है। उस साल यूएससीआईएस ने भारतीयों के 47,601 ईबी-2 आवेदनों को मंजूरी दी थी। आश्रितों को मिलाकर यह आंकड़ा करीब 98,594 लोगों का था। लेकिन उसी वर्ष ईबी-2 के जरिए सिर्फ 4,407 भारतीयों को स्थायी निवास मिला। यानी अकेले उस साल 90,000 से ज्यादा लोग कतार में जुड़ गए। यह सिलसिला 2017 और 2018 में भी जारी रहा।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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