
जंग खत्म हो गई तो ट्रंप को नोबेल के लिए नॉमिनेट करूंगी, यूक्रेन-रूस वार्ता के बाद बोलीं इटली की PM
रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच अबू धाबी में पहली त्रिपक्षीय वार्ता खत्म हो गई है। वाइट हाउस के मुताबिक यह वार्ता बहुत सकारात्मक रही। वहीं इटली की पीएम ने युद्ध खत्म होने पर ट्रंप को नोबेल के लिए नॉमिनेट करने का दावा किया है।
रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से जारी युद्ध के बीच पहली बार ऐसा हुआ है जब दोनों देश टेबल पर आए हैं। अबू धाबी में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच युद्ध के समाधान को लेकर वार्ता हुई। अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय ने इस वार्ता को बेहद सकारात्मक बताते हुए कहा है कि बातचीत आगे भी जारी रहेगी। इसी बीच इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि अगर डोनाल्ड ट्रंप यह युद्ध खत्म करवा देते हैं तो वह खुद उनको नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करेंगी।
गौरतलब है कि फरवरी 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार तीनों पक्ष त्रिपक्षीय रूप में मिल रहे हैं और बातचीत का पहला दिन खत्म होने के बाद कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने कहा है कि राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव और जीआरयू सैन्य खुफिया प्रमुख एडमिरल इगोर कोस्त्युकोव के नेतृत्व वाली रूसी टीम सुरक्षा मामलों पर ध्यान केंद्रित करेगी।
कहां अटकी है रूस और यूक्रेन के बीच बात
उशाकोव ने बैठक से पहले मीडिया से कहा, "हम राजनीतिक और राजनयिक माध्यमों से यूक्रेनी संकट को हल करने में रुचि रखते हैं। अगर ऐसा नहीं होता है, तो रूस युद्ध के मैदान में अपने लक्ष्यों को हासिल करना जारी रखेगा।"
तीनों पक्षों ने कहा कि क्षेत्रीय मुद्दा शांति समझौते में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। रूस की मांग है कि यूक्रेन अपने नियंत्रण वाले रूसी क्षेत्र के कुछ हिस्सों से अपने सैनिकों को हटा ले और रूस की नयी सीमाओं को मान्यता दे। यूक्रेनी नेता व्लादिमीर जेलेंस्की ने ऐसी कोई भी रियायत देने से इनकार कर दिया है।
कुछ हिस्सा रूस को सौंपने को कह रहे थे डोनाल्ड ट्रंप
पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति के लिए 28-सूत्रीय रोडमैप का प्रस्ताव दिया था, जिसमें यूक्रेन से रूस को कुछ क्षेत्र सौंपने का आग्रह किया गया था। यूक्रेन के अधिकारियों के साथ-साथ यूरोप में यूक्रेन के समर्थकों ने भी इस योजना को रूस के लिए बहुत अनुकूल बताकर खारिज कर दिया था। रूस ने बदले में यूरोपीय संघ पर बातचीत को खराब करने और संघर्ष को लंबा खींचने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
रूस ने फिलहाल यूक्रेन के करीब 19 फीसदी हिस्से पर कब्जा कर रखा है। रूस की मांग है कि वह कुछ हिस्सा और रूस को सौंपे और वर्तमान में कब्जा किए गए हिस्से को भी मान्यता दे दे। इसके अलावा रूस का कहना है कि युक्रेन किसी भी कीमत पर नाटो से ना जुड़े और युद्ध खत्म होने के बाद कोई भी नाटो का सैनिक यूक्रेन में ना आए।
वहीं जेलेंस्की अमेरिका से सुरक्षा की गारंटी की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा वह कोई भी हिस्सा रूस को देने को तैयार नहीं हैं। दावोस में डोनाल्ड ट्रंप ने जेलेंस्की से लंबी बात की थी। जेलेंस्की का कहना है कि सुरक्षा की गारंटी को लेकर द्तावेज तैयार हो गए हैं अब बस दोनों देशों की मंजूरी का इंतजार है। यूक्रेन ने अमेरिका से मिसाइलों की भी मांग की है।

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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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