US का फिल्मी ऑपरेशन, अपने एजेंट को निकोलस मादुरो का करीबी बनाया, फिर वेनेजुएला में घुसकर उठाया
CIA यानी अमेरिकी खुफिया सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी की एक सीक्रेट टीम वेनेजुएला में पहचान बदलकर दाखिल हुई। इस टीम में अनुभवी एजेंट शामिल थे। इनका मकसद मादुरो की हर हरकत पर नजर रखना। उससे जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जुटाना।
अमेरिका ने वनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर दुनियाभर में हलचल मचा दी है। अब अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने ऑपरेशन 'एबसोल्यूट रिजॉल्व' का विवरण दिया है। उन्होंने कहा कि यह बेहद सूक्ष्म योजना पर आधारित अमेरिकी सैन्य मिशन था, जिसका उद्देश्य वेनेजुएला के नेता मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेना था। इस दौरान उन्होंने बताया कि एक सीक्रेट एजेंट मादुरो की खबरें अमेरिका पहुंचा रहा था।
जनरल केन के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर शुक्रवार देर रात शुरू हुए इस अभियान में सभी सैन्य शाखाओं, खुफिया एजेंसियों और कानून प्रवर्तन संस्थाओं की भागीदारी रही। ऑपरेशन में 150 से अधिक सैन्य विमानों का इस्तेमाल किया गया। अमेरिका के एक करीबी इनसाइडर को मादुरो के घेरे में शामिल कराया गया। उसने ऑपरेशन के लिए कई खास टिप्स दिए।
CIA यानी अमेरिकी खुफिया सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी की एक सीक्रेट टीम वेनेजुएला में पहचान बदलकर दाखिल हुई। इस टीम में अनुभवी एजेंट शामिल थे। इनका मकसद मादुरो की हर हरकत पर नजर रखना। उससे जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जुटाना। वे महीनों तक कराकास की गलियों में छिपकर रहे। उन्होंने बताया कि मादुरो के रोजाना के रूटीन की निगरानी की गई। जैसे वे सुबह कहां जाते, क्या खाते, किससे मिलते, यहां तक कि उनके पालतू जानवरों की आदतें भी नोट की जातीं।
मादुरो किसी एक जगह पर नहीं रहते। वे 6 से 8 जगहों पर बारी-बारी से रह रहे थे। इसकी जानकारी डेल्टा फोर्स को पहले से ही थी। ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए अमेरिकी सेना को इस बात की जानकारी होना जरूरी था कि मादुरो उसी परिसर में मौजूद रहे जिस पर वे हमला करने वाले हैं। इसलिए सटीक टाइमिंग जरूरी थी।
राष्ट्रपति भवन का मॉडल बनाकर अभ्यास किया
मादुरो को पकड़ने की जिम्मेदारी अमेरिका के सबसे खतरनाक और स्पेशल यूनिट डेल्टा फोर्स को सौंपा गया। अमेरिका के केंटकी शहर में ज्वाइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड ने मादुरो के कंपाउंड यानी राष्ट्रपति भवन का फुल-स्केल मॉडल बनाया और हमले का अभ्यास किया। इस मिशन को 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' नाम दिया गया। कमांडो दिन-रात यहां अभ्यास करते।

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