सैनिकों की हुई कमी तो यूक्रेन ने युद्ध में उतारे रोबोट, ‘साइलेंट डेथ’ बनकर रूस पर ढा रहे कहर

लाइव हिन्दुस्तान, कीव
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युद्ध के मैदान में अब सिपाही गोलियां नहीं बरसा रहे हैं। अब रोबोट ‘साइलेंट डेथ’ बनकर दुश्मन पर कहर बरपा रहे हैं। यह नजारा है रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का। रूस-ईरान युद्ध अपने चौथे साल में प्रवेश कर चुका है।

सैनिकों की हुई कमी तो यूक्रेन ने युद्ध में उतारे रोबोट, ‘साइलेंट डेथ’ बनकर रूस पर ढा रहे कहर

युद्ध के मैदान में अब सिपाही गोलियां नहीं बरसा रहे हैं। अब रोबोट ‘साइलेंट डेथ’ बनकर दुश्मन पर कहर बरपा रहे हैं। यह नजारा है रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का। रूस-ईरान युद्ध अपने चौथे साल में प्रवेश कर चुका है। अब हालत यह है कि यूक्रेन के पास सैनिकों की कमी पड़ने लगी है। इसकी भरपाई करने के लिए उसने टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है। इसके लिए बड़े पैमाने पर रोबोट सैनिक तैयार किए गए हैं। ऐसे में जहां हजारों सिपाहियों की जरूरत थी, वहां केवल कुछ मशीनें सबकुछ तहस-नहस कर डाल रही हैं।

सैनिकों की पड़ने लगी है कमी
रूस ने साल 2022 में यूक्रेन पर हमला बोला था। उस वक्त लगा था कि यह युद्ध महज कुछ दिनों में रूस जीत लेगा। लेकिन यूक्रेन ने बड़ी बहादुरी से सामना किया और युद्ध अब चौथे साल में खिंच चुका है। लेकिन इन सबमें यूक्रेन के पास सैनिकों की कमी पड़ने लगी है। ऐसे में उसने टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है। अब हथियार और विस्फोटक लादे ड्रोन्स और रोबोट्स दुश्मन को ठिकाने लगा रहे हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक इन रोबोट्स को हजारों मील दूर से ऑपरेट किया जा रहा है। रूसी सेना के ठिकानों और पोजीशंस को ट्रैक करने के बाद हमलों को अंजाम दिया जा रहा है।

जेलेंस्की ने क्या कहा
यू्क्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के मुताबिक इस साल केवल जनवरी में ही 22 हजार से ज्यादा ड्रोन्स और रोबोट युद्ध में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने यह भी दावा किया हाल ही में यूक्रेन ने बिना एक भी सैनिक को मैदान में उतारे, केवल रोबोट्स और ड्रोन्स के दम पर रूसी पोजीशन पर कब्जा कर लिया। युद्ध के मैदान में मशीनों की तैनाती यह दिखाती है कि अब चीजें किस तरह से बदल गई हैं। यह रोबोट सोल्जर्स और ड्रोन्स न केवल युद्ध लड़ रहे हैं, बल्कि बचाव कार्य में भी मददगार साबित हो रहे हैं। इनकी मदद से फ्रंटलाइन पर हथियार, खाना और पानी पहुंचाना आसान हुआ है। वहीं, घायल सिपाहियों को हटाना और उन्हें सुरक्षित जगह ले जाने में भी यह सटीक साबित हो रहे हैं।


युवा प्रोग्रामर्स बने मददगार
कुछ रोबोट सिस्टम को हैवी मशीनगन से लैस किया गय है। यह कई दिनों तक छिपे तौर पर सकते हैं और मौका मिलते ही हमला बोल सकते हैं। इस मिशन में युवा प्रोग्रामर्स और टेक्नीशियंस को लगाया गया है। यह सब मिलकर कम्यूनिकेशन सिस्टम, नेविगेशन सॉफ्टवेयर और काउंटर-जैमिंग टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं। इनकी मदद से यूक्रेनी रूसी सेना को टक्कर देने में कामयाब हो रहा है। इसके अलावा भी टेक्नोलॉजी का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। चाहे वो ड्रोन्स और रोबोट्स के सफल मूवमेंट के लिए जीपीएस की बात हो या फिर ड्रोन्स फुटेज को रिकॉर्ड करने की बात हो।

हजारों सैनिकों का काम कर रहे कुछ रोबोट्स
विशेषज्ञों का कहना है यूक्रेन ने बहुत जल्द ही ड्रोन और रोबोट में निवेश कर दिया। इसकी बदौलत वह न सिर्फ रूस को कड़ी टक्कर दे रहा है, बल्कि अपने देश के सिपाहियों की बहुमूल्य जान भी बचा रहे हैं। यूक्रेनी कमांडरों का तर्क है कि रोबोट जान बचा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक सिर्फ 164 रोबोट की मदद से ऐसे परिणाम हासिल किए गए हैं, जिसके लिए हजारों सैनिकों की जरूरत पड़ती। बखमुत और अवदीवका जैसी जंग में शामिल रहे योद्धाओं का कहना है कि अगर युद्ध की शुरुआत में यह तकनीक उपलब्ध होती तो कई साथी सैनिकों की जान बच सकती थी।

Deepak Mishra

लेखक के बारे में

Deepak Mishra

मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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