आसिम मुनीर को भाई बोला ईरान, ट्रंप ने लिया नाम; दोनों का भरोसेमंद कैसे बना पाकिस्तान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, 'मैं अपने प्रिय भाइयों, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ और फील्ड मार्शल मुनीर का आभार और धन्यवाद व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस क्षेत्र में युद्ध को समाप्त करने के लिए काफी प्रयास किए हैं।'

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम का सेहरा पाकिस्तान के सिर बंध रहा है। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तानी नेतृत्व का जिक्र कर चुके हैं। वहीं, ईरान भी भूमिका मानने से इनकार नहीं कर रहा है। अब सवाल है कि आखिर दोनों ही मुल्कों को परेशान हाल पाकिस्तान पर भरोसा कैसे जम गया कि उसके सहारे प्रस्ताव भी तैयार किए और सीजफायर भी कर लिया। हालांकि, इसमें चीन की भूमिका भी चर्चा में हैं।
पाकिस्तान में कैसे जमा भरोसा
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पाकिस्तान और अमेरिका के बीच रिश्ते बेहतर होते नजर आए हैं। इतना ही नहीं ट्रंप पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को 'फेवरेट फील्ड मार्शल' तक करार दे चुके हैं। खबरें ये भी हैं कि सीजफायर से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने मुनीर और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से चर्चा की थी।
उन्होंने ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा, 'पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर से हुई बातचीत के आधार पर, जिसमें उन्होंने मुझसे ईरान पर आज रात होने वाले विनाशकारी हमले को रोकने का अनुरोध किया था। साथ ही ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरा, तत्काल और सुरक्षित तरीके से खोलने के मद्देनजर मैं दो सप्ताह के लिए ईरान पर दो हफ्ते के लिए बमबारी और हमले रोकने के लिए तैयार हो गया हूं।'
ईरान को भी रहा भरोसा
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पहले ही पाकिस्तान नेताओं को अपना भाई करार दे चुके हैं। उन्होंने कहा, 'मैं अपने प्रिय भाइयों, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ और फील्ड मार्शल मुनीर का आभार और धन्यवाद व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस क्षेत्र में युद्ध को समाप्त करने के लिए काफी प्रयास किए हैं।'
इजरायल भी है फैक्टर
पाकिस्तान की सीमा ईरान से लगी हुई है और दोनों के बीच कूटनीतिक संबंध भी हैं। वहीं, पाकिस्तान के फिलिस्तीन मुद्दे के चलते इजरायल से कूटनीतिक रिश्ते नहीं हैं। माना जा रहा है कि एक और वजह रही कि जिसके चलते ईरान का भरोसा पाकिस्तान पर बना। इसके अलावा ईरान पहले ही मिडिल ईस्ट के कई देशों को निशाना बना चुका था।
ईरान की शर्तें
इस समझौते में एक-दूसरे पर हमला न करने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बनाए रखने, यूरेनियम संवर्धन की अनुमति देने, सभी प्राथमिक व माध्यमिक प्रतिबंधों को हटाने, UNSC और IAEA के सभी प्रस्तावों को समाप्त करने, ईरान को मुआवजा देने, क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी करने और लेबनान के इस्लामिक रेजिस्टेंस सहित सभी मोर्चों पर युद्ध रोकने की शर्तें शामिल हैं।
चीन भी हो सकता है शामिल
एपी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि चीन ने ईरान के नेताओं से बातचीत करके उन्हें अमेरिका से युद्धविराम का रास्ता तलाशने के लिए राजी करने की कोशिश की। दो अधिकारियों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि बातचीत के दौरान चीनी अधिकारी ईरानी अधिकारियों के संपर्क में थे। एक अधिकारी ने कहा कि चीन अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है और वह मुख्य रूप से पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र समेत मध्यस्थों के साथ काम कर रहा है।
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