ईरान के पास कितने 'अदृश्य बम'? रिपोर्ट में खुलासा; टेंशन में क्यों अमेरिका-इजरायल

Mar 11, 2026 06:49 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, वॉशिंगटन
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अमेरिका ने हाल ही में दावा किया है कि ईरान ने फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में बारुदी सुरंगे बिछानी शुरू कर दी हैं। ये सुरंगे इस जलमार्ग में जहाजों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकती हैं।

ईरान के पास कितने 'अदृश्य बम'? रिपोर्ट में खुलासा; टेंशन में क्यों अमेरिका-इजरायल

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक अमेरिकी संसदीय रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ईरान के पास लगभग 5,000 से 6,000 तक समुद्री बारूदी सुरंगें (Naval Mines) मौजूद हैं। यह जानकारी पिछले साल प्रकाशित अमेरिकी संसद की एक रिपोर्ट से पता चलता है, जिसमें क्षेत्रीय संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसके प्रभाव का विश्लेषण किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि ईरान इन समुद्री सुरंगों यानी अदृश्य बमों का इस्तेमाल करता है तो होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। दरअसल, यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है।

खुफिया सूत्रों के अनुसार हाल के दिनों में ईरान ने इस जलमार्ग में कुछ समुद्री सुरंगें बिछानी भी शुरू कर दी हैं। हालांकि अभी उनकी संख्या सीमित बताई जा रही है। अमेरिका ने हाल ही में दावा किया है कि ईरान ने फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में बारुदी सुरंगे बिछानी शुरू कर दी हैं। ये सुरंगे इस जलमार्ग में जहाजों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकती हैं। ये सुरंगें ओमान की खाड़ी से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य तक के रास्तों को अवरुद्ध कर, तेल आपूर्ति में बाधा डालकर, वैश्विक युद्ध को एक नया और विनाशकारी मोड़ दे सकती हैं।

विभिन्न प्रकार की समुद्री सुरंगें

CNN की रिपोर्ट में कहा गया है कि माना जाता है कि 2019 में तेहरान के पास 5,000 से अधिक बारुदी सुरंगों का शस्त्रागार था, जो 2025 के अनुमानों में बढ़कर लगभग 6,000 तक पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार ईरान के पास कई प्रकार की बारूदी सुरंगें हैं, जिनमें लिम्पेट माइन (जिन्हें जहाज के ढांचे से चिपकाया जा सकता है) मूरड माइन (जो पानी के नीचे तैरती रहती हैं और जहाज से टकराने पर फट जाती हैं) और बॉटम माइन (जो समुद्र की तलहटी में रहती हैं और जहाज के पास आने पर विस्फोट करती हैं) शामिल हैं।

ईरान की समुद्री क्षमता बरकरार

खुफिया जानकारी के आधार पर, अमेरिकी सेना ने कथित तौर पर ईरान के 16 माइन-लेयर जहाजों को नष्ट कर दिया है ताकि इन सुरंगों को बिछाने से रोका जा सके। अमेरिकी खुफिया सूत्रों का कहना है कि ईरान के पास अभी भी अपनी 80-90% छोटी नौकाएं और माइन बिछाने वाले जहाज सुरक्षित हैं। इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर वह कुछ ही समय में सैकड़ों सुरंगें इस जलमार्ग में बिछा सकता है। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरंगें बिछाई हैं तो उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को बाधित किया गया तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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