ईरान युद्ध कब तक चलेगा? डोनाल्ड ट्रंप के 'खास' ने बता दी समाप्ति की समयसीमा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष आर्थिक सलाहकार और वाइट हाउस की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के प्रमुख केविन हैसेट ने युद्ध की अवधि पर बड़ा बयान दिया है। हैसेट ने सीबीएस के फेस द नेशन कार्यक्रम में बताया कि पेंटागन का अनुमान है कि यह युद्ध चार से छह सप्ताह तक चलेगा।

मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। युद्ध अब अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जबकि तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष आर्थिक सलाहकार और वाइट हाउस की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के प्रमुख केविन हैसेट ने युद्ध की अवधि पर बड़ा बयान दिया है। हैसेट ने सीबीएस के 'फेस द नेशन' कार्यक्रम में बताया कि पेंटागन का अनुमान है कि यह युद्ध चार से छह सप्ताह तक चलेगा। उन्होंने कहा कि शनिवार तक पेंटागन को लगता था कि इस मिशन को पूरा करने में चार से छह सप्ताह लगेंगे और हम निर्धारित समय से आगे चल रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय राष्ट्रपति ट्रंप का ही होगा।
हैसेट ने उम्मीद जताई कि मिशन समाप्त होते ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह नष्ट करने के लक्ष्य पर जोर दिया और कहा कि अमेरिका के घरेलू तेल उत्पादन के कारण ईरान का प्रभाव 1970 के दशक के तेल संकटों जितना नहीं होगा। उन्होंने ईरान के इरादों को खारिज करते हुए कहा कि वे सोचते हैं कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाकर राष्ट्रपति ट्रंप को पीछे हटने पर मजबूर कर देंगे। इससे ज्यादा मूर्खतापूर्ण बात और कोई नहीं हो सकती। हमारे पास तेल का भंडार है।
दूसरी ओर, ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने एबीसी के 'दिस वीक' कार्यक्रम में कहा कि उच्च तेल और गैसोलीन कीमतों के बावजूद यह संघर्ष अगले कुछ हफ्तों में समाप्त हो जाएगा, शायद उससे भी पहले। उन्होंने बताया कि इसके बाद आपूर्ति में सुधार होगा और कीमतें गिरेंगी। राइट ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को नष्ट करने के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि यह थोड़े समय का कष्ट है, जो बेहतर स्थिति तक पहुंचाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण के कारण शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल से अधिक पर बंद हुआ। यह जलडमरूमध्य दुनिया के एक-पांचवें तेल और लगभग उतने ही द्रवीकृत प्राकृतिक गैस के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को अन्य देशों से जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए युद्धपोत भेजने का आह्वान किया और चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया तथा ब्रिटेन से भागीदारी की उम्मीद जताई। हालांकि, जापान की सत्तारूढ़ पार्टी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने टैंकरों की सुरक्षा के लिए जहाज भेजने को 'कड़ी चुनौती' बताया।
ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने अमेरिकियों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ईरान को क्षेत्रीय खतरे के रूप में समाप्त करना सार्थक लक्ष्य है, भले ही अल्पकालिक व्यवधान और लागत बढ़ोतरी हो। प्रशासन का मानना है कि ईरान का कमजोर नेतृत्व अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों के बावजूद अडिग है, लेकिन अंत में अमेरिकी शक्ति विजयी होगी।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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