क्या है 'ट्रिपल H', जिस पर खामेनेई के खत्म होते ही मंडराया खतरा; इजरायल बनेगा सुपर पावर

Mar 01, 2026 09:13 am ISTSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान
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इन तीन संगठनों के जरिए ईरान ने मिडल ईस्ट के तीन देशों पर भी अपना कंट्रोल कायम रखा है। जैसे हूती विद्रोहियों के चलते ईरान का यमन पर एक होल्ड रहा है। इसी तरह हिजबुल्लाह लेबनान में सक्रिय रहे हैं और इजरायल के लिए भी सिरदर्द बनते रहे हैं। हमास फिलिस्तीन में ऐक्टिव है और उसने ही इजरायल पर हमला किया था।

क्या है 'ट्रिपल H', जिस पर खामेनेई के खत्म होते ही मंडराया खतरा; इजरायल बनेगा सुपर पावर

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई को भी इजरायल और अमेरिका ने हमलों में मार गिराया है। खामेनेई के मारे जाते ही ईरान में 47 साल से चला आ रहा इस्लामिक शासन अब समाप्त हो गया है। इसके साथ ही अब चर्चा है कि अमेरिका कि पिट्ठू सरकार ही ईरान में कमान संभाल सकती है। अमेरिका में रह रहे ईरान के क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को ही ईरान में अब सत्ता मिलने के कयास लग रहे हैं। इस बीच एक्सपर्ट्स कयास लगा रहे हैं कि आखिर ईरान में खामेनेई के मारे जाने के बाद क्या बदल जाएगा। यही नहीं खामेनेई के मारे जाने से मिडल ईस्ट में भी बहुत कुछ बदल जाएगा। इसके कारण इजरायल सुपर पावर के तौर पर उभर सकता है।

इसकी वजह यह है कि ईरान की सेना के समर्थन से चलने वाले उग्रवादी समूहों हमास, हूती और हिजबुल्लाह अब कमजोर हो जाएंगे। माना जाता रहा है कि इन तीनों को ईरान का समर्थन रहा है और इनके जरिए ही वह मध्य पूर्व में इजरायल और अमेरिका जैसी ताकतों का सामना करता रहा है। इसके अलावा सऊदी अरब और तुर्की के मुकाबले वह शिया इस्लाम की नुमाइंदगी भी मजबूती से करता रहा है। अब जबकि अमेरिका के समर्थन वाली सरकार बनने का रास्ता ईरान में साफ हो रहा है तो साफ है कि इन तीन संगठनों का भी वर्चस्व कम हो जाएगा।

दिलचस्प तथ्य है कि इन तीन संगठनों के जरिए ईरान ने मिडल ईस्ट के तीन देशों पर भी अपना कंट्रोल कायम रखा है। जैसे हूती विद्रोहियों के चलते ईरान का यमन पर एक होल्ड रहा है। इसी तरह हिजबुल्लाह लेबनान में सक्रिय रहे हैं और इजरायल के लिए भी सिरदर्द बनते रहे हैं। गाजा और वेस्ट बैंक में सक्रिय आतंकी संगठन हमास को भी ईरान का समर्थन रहा है। ऐसे में अब जब ईरान से इस्लामिक शासन समाप्त हो जाएगा तो ये तीनों संगठन भी कमजोर होंगे, जो उसके समर्थन पर आश्रित रहे हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर इलाके में इजरायल को फायदा पहुंचाएगी और वह सुपर पावर के तौर पर उभरेगा।

सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कतर जैसे कई इस्लामिक देश लंबे समय से अमेरिका के सहयोगी हैं। इसी के कारण वे इजरायल के भी करीब आए हैं और अदावत कम हुई है। ईरान ही एक ऐसा बड़ा देश रहा है, जो खुलकर इजरायल के खिलाफ था। अब वहां भी शासन बदल जाएगा तो इजरायल का वर्चस्व बढ़ेगा। इस तरह एक झटके में ही इजरायल के लिए हालात अनुकूल होते दिख रहे हैं। कई मुस्लिम देशों के साथ तो वह अब्राहम अकॉर्ड ही कर चुका है। ऐसे में कम ही मुसलमान देश अब होंगे, जो इजरायल के खिलाफ होंगे। इस तरह दबाव में ही सही, लेकिन इजरायल की ताकत और स्वीकार्यता में बढ़ोतरी हो रही है।

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दुनियादारी में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। समकालीन राजनीति पर लिखने के अलावा सामरिक मामलों, रणनीतिक संचार और सभ्यतागत प्रश्नों के अध्ययन में रुचि रखते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले सूर्यप्रकाश को पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। 10 वर्षों से ज्यादा समय से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं राज्यों से संबंधित खबरों का संपादन करते हैं एवं डेस्क इंचार्ज के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। समाचारों के त्वरित प्रकाशन से लेकर विस्तृत अध्ययन के साथ एक्सप्लेनर आदि में भी रुचि रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज प्रकाशित करने और खबरों के अंदर की खबर को विस्तार से समझाने में रुचि रखते हैं। हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को समझते हैं और उसके अनुसार ही पाठकों को खबरें देने के लिए तत्परता रखते हैं।


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