Explainer: चीन से गए 26 फोन कॉल और बदल गया पूरा खेल, कैसे ड्रैगन ने पर्दे के पीछे रह रुकवा दी बड़ी जंग

Jagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर के ऐलान के बाद खुद कहा था कि उन्हें लगता है कि ईरान को सीजफायर के लिए चीन ने मनाया है। वहीं ईरानी अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की।

चीन से गए 26 फोन कॉल और बदल गया पूरा खेल, कैसे ड्रैगन ने पर्दे के पीछे रह रुकवा दी बड़ी जंग

ईरान और अमेरिका के बीच 2 हफ्ते का युद्धविराम लागू करवाने में चीन ने बेहद अहम भूमिका निभाई। चीन के विदेश मंत्रालय ने खुद इसका खुलासा किया है। चीनी विदेश मंत्री ने हाल ही में एक बयान में बताया कि किस तरह उन्होंने 26 फोन कॉल्स किए जिससे यह समझौता संभव हो पाया। इन खुलासों से इस बात पर मुहर लग गई है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता करवाना पाकिस्तान के बस की बात नहीं थी और पाक सिर्फ एक पोस्टमैन की भूमिका निभा रहा है।

एक तरफ पाकिस्तान जहां इस युद्धविराम का क्रेडिट लेने के लिए खुद के लिए नोबेल तक मांग रहा है, वहीं चीन ने पर्दे के पीछे रहकर सबकुछ समेटने में अहम भूमिका निभाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने आखिरी समय में ईरान पर दबाव बनाया, जिसके बाद तेहरान बातचीत के लिए तैयार हुआ और तनाव कम करने का फैसला लिया।

डेडलाइन का था दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान को बड़ा अल्टीमेटम दे दिया था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कड़े शब्दों में धमकी देते हुए कहा कि अगर यह रास्ता नहीं खोला गया तो पूरी ईरानी सभ्यता खत्म कर दी जाएगी। ट्रंप की धमकी खत्म होने से पहले ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी हो गई थी। ईरान के कई ठिकानों पर बमबारी शुरू भी हो गई थी। वहीं ईरान भी पीछे हटता नजर नहीं आ रहा था। इसके बाद चिंताएं बढ़ गई थीं।

कई देश कर रहे थे कोशिशें

खतरे को देखते हुए पाकिस्तान के अलावा तुर्की, मिस्र और कतर जैसे देशों ने युद्धविराम कराने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए थे। लेकिन इन सब कोशिशों के बावजूद बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही थी। ईरान पीछे हटने से साफ मना कर रहा था। इसके बाद चीन की एंट्री हुई और गेम बदल गया।

चीन से गए 26 फोन कॉल्स

रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने युद्ध के दौरान ईरान, इजरायल, रूस और खाड़ी देशों के नेताओं के साथ 26 बार फोन पर बातचीत की। डेडलाइन से ठीक पहले चीनी विदेश मंत्री ने ईरान से खास तौर पर बातचीत कर युद्धविराम के लिए राजी करने की कोशिश की। आखिरकार चीन के दबाव के बाद ईरान ने रुख नरम किया और बातचीत के लिए तैयार हो गया। खुद ट्रंप ने भी माना कि चीन इस प्रक्रिया में शामिल था।

क्यों आगे आया चीन?

चीन की इस पहल के पीछे उसके अपने आर्थिक और रणनीतिक हित हैं। चीन दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक है और खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने से उसकी ऊर्जा सप्लाई पर सीधा असर पड़ सकता था। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कोई भी बाधा चीन की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकती थी। इसके अलावा, यह कदम चीन को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में पेश करता है, जो सिर्फ ताकत नहीं बल्कि कूटनीति से भी संकट सुलझाना चाहता है। इससे क्षेत्र में चीन का प्रभाव और बढ़ता है।

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लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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