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पाकिस्तान में महामारी बन रही HIV, 15 साल में तिगुने हुए मामले; बच्चों पर तेजी से बढ़ता खतरा

पाकिस्तान में महामारी बन रही HIV, 15 साल में तिगुने हुए मामले; बच्चों पर तेजी से बढ़ता खतरा

संक्षेप:

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2010 में जहां कुल मामले 16000 थे, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर 48000 हो गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पाकिस्तान पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में HIV की सबसे तेजी से फैलने वाली महामारी का सामना कर रहा है।

Dec 02, 2025 02:45 pm ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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पाकिस्तान में ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) का संक्रमण अब महामारी का रूप ले चुका है। पिछले 15 सालों में पाकिस्तान में HIV के मामलों में 200 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। यानी पाकिस्तान में मामले तीन गुना हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2010 में जहां कुल मामले 16000 थे, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर 48000 हो गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, पाकिस्तान पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में HIV की सबसे तेजी से फैलने वाली महामारी का सामना कर रहा है।

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पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जानकारी विश्व एड्स दिवस के मौके पर WHO और UNAIDS द्वारा आयोजित जागरूकता वॉक में साझा की गई। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पहले HIV मुख्य रूप से उच्च जोखिम वाले समूहों (जैसे नशीले पदार्थों का इंजेक्शन लेने वाले) तक सीमित था, लेकिन अब यह बच्चों, जीवनसाथियों और सामान्य आबादी तक तेजी से फैल रहा है।

HIV फैलने के मुख्य कारण क्या है?

  • असुरक्षित रक्त आधान
  • दूषित सुई/इंजेक्शन का बार-बार उपयोग
  • संक्रमण नियंत्रण में गंभीर कमी
  • प्रसव पूर्व देखभाल में HIV जांच की कमी
  • असुरक्षित यौन संबंध
  • HIV से जुड़ा सामाजिक कलंक

इलाज और जांच सुविधाओं तक सीमित पहुंच

रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान है कि पाकिस्तान में वास्तव में करीब 3.5 लाख लोग HIV से संक्रमित हैं, लेकिन इनमें से लगभग 80% लोग अपनी स्थिति से पूरी तरह अनजान हैं। बच्चों पर इसका असर विशेष रूप से भयावह है। 0-14 साल के बच्चों में नए HIV मामले 2010 में 530 थे, जो 2023 तक बढ़कर 1800 हो गए। पिछले दशक में एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) लेने वाले मरीजों की संख्या में 8 गुना इजाफा हुआ है। 2013 में 6500 से बढ़कर 2024 में 55500 हो गई। इसी तरह ART केंद्रों की संख्या 2010 में 13 से बढ़कर 2025 में 95 हो गई है।

बनी हुई है गंभीर स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में केवल 21 फीसदी संक्रमितों को अपनी बीमारी का पता था। हैरान करने वाली बात ये है कि इनमें से सिर्फ 16% इलाज ही कर रहे थे, और मात्र 7 प्रतिशत ने वायरल लोड को दबा पाया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2024 में AIDS से 1100 से अधिक लोगों की मौतें हुईं है। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार कई मामलों में 80% से अधिक मामले बच्चों के थे। सबसे दुखद बात यह है कि 0-14 साल के HIV पॉजिटिव बच्चों में से केवल 38 प्रतिशत को ही इलाज मिल पा रहा है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap
देवेन्द्र कश्यप, लाइव हिंदुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर। पटना से पत्रकारिता की शुरुआत। महुआ न्यूज, जी न्यूज, ईनाडु इंडिया, राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे बड़े संस्थानों में काम किया। करीब 11 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत। MCU भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई। पटना व‍िश्‍वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क पर सेवा दे रहे हैं। और पढ़ें

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