ईरान से लड़ने में कंगाल हुआ अमेरिका? युद्ध के लिए अरब देशों से खर्च मांग सकते हैं ट्रंप

Nisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनका प्रशासन सैन्य अभियानों को समाप्त करने के लिए ईरान के साथ 'गंभीर बातचीत' कर रहा है। उन्होंने साथ ही धमकी दी कि यदि 'शीघ्र' कोई समझौता नहीं होता है तो खाड़ी देश के ऊर्जा संसाधनों को बड़े पैमाने पर नष्ट कर दिया जाएगा।

ईरान से लड़ने में कंगाल हुआ अमेरिका? युद्ध के लिए अरब देशों से खर्च मांग सकते हैं ट्रंप

ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को जारी रखने के लिए अमेरिका अब अरब देशों से खर्च मांगने की तैयारी में है। हालांकि, इसे लेकर अमेरिका ने कोई प्लान साझा नहीं किया है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐसे विचार रखते हैं। 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को एक महीने से ज्यादा का समय बीत गया है। वहीं, ईरान ने अमेरिका की तरफ से मध्यस्थों के जरिए भेजे प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया है।

वाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका खर्च के लिए अरब देशों का रुख कर सकता है। प्रेस ब्रीफिंग के दौरान लेविट से पूछा गया कि क्या अरब देश युद्ध के खर्च में मदद के लिए आगे आएंगे। इसपर लेविट ने कहा कि वह राष्ट्रपति ट्रंप से पहले कुछ नहीं कहेंगी लेकिन राष्ट्रपति ऐसा विचार रखते हैं।

उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि राष्ट्रपति उन्हें ऐसा करने के लिए कहने में काफी दिलचस्पी लेंगे।' उन्होंने कहा, 'यह एक ऐसा विचार है जिसके बारे में मैं जानती हूं कि उनके मन में है, और मुझे लगता है कि आप जल्द ही इसके बारे में उनसे और सुनेंगे।'

ट्रंप ने दी ईरान को धमकी

ट्रंप ने रविवार को ईरान को नए सिरे से धमकी देते हुए कहा कि अगर शांति समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों, तेल के कुओं और खार्ग द्वीप को नेस्तनाबूद कर देगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनका प्रशासन सैन्य अभियानों को समाप्त करने के लिए ईरान के साथ 'गंभीर बातचीत' कर रहा है। उन्होंने साथ ही धमकी दी कि यदि 'शीघ्र' कोई समझौता नहीं होता है तो खाड़ी देश के ऊर्जा संसाधनों को बड़े पैमाने पर नष्ट कर दिया जाएगा।

ट्रंप ने पोस्ट में कहा कि बहुत प्रगति हुई है, लेकिन अगर किसी भी कारण से जल्द ही कोई समझौता नहीं हो पाता है, जिसकी आशंका बहुत अधिक है, और अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तुरंत व्यापार के लिए नहीं खुलता है, तो हम ईरान में अपनी कार्रवाई का समापन उनके सभी बिजली उत्पादन संयंत्रों, तेल कुओं और खार्ग द्वीप को उड़ाकर और पूरी तरह से नष्ट करके करेंगे।'

और जंग लड़ने तैयार ईरान

ईरान के खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम ज़ोलफकारी ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के थोपे गए युद्ध का अंत ईरान ही तय करेगा। उन्होंने सोमवार को जारी बयान में ट्रंप की धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि ईरानी सशस्त्र बलों ने हमेशा स्पष्ट किया है कि वे युद्ध की शुरुआत नहीं करते, लेकिन किसी भी संघर्ष का अंत कब और कैसे होगा, यह वे खुद ही तय करेंगे।

Donald Trump

ईरान बोला- अमेरिका से कोई सीधी बात नहीं

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान ने अब तक अमेरिका के साथ कोई प्रत्यक्ष वार्ता नहीं की है, हालांकि मध्यस्थों के माध्यम से बातचीत की अमेरिकी इच्छा से जुड़े संदेश उसे प्राप्त हुए हैं। बघाई ने सोमवार को साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा, 'जब अमेरिका वार्ता और कूटनीति की बात करता है तो संवेदनशीलता बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि स्वयं अमेरिका के भीतर भी इन दावों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।' उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भी अमेरिका के कूटनीतिक दावों पर भरोसा सीमित है।

बघाई ने कहा कि ईरान का रुख स्पष्ट और स्थिर रहा है, जबकि 'दूसरी तरफ' दूसरा पक्ष बार-बार अपना रुख बदलता रहा है और विरोधाभासी बयान देता रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान तक जो प्रस्ताव पहुंचे हैं, चाहे उन्हें 15 सूत्रीय योजना कहा जाए या किसी अन्य नाम से पुकारा जाए, उनमे 'अत्यधिक, अव्यावहारिक और तर्कहीन' मांगें शामिल हैं।

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लेखक के बारे में

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निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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