
पुरुषों को फंसा रही थी इस देश के पूर्व राष्ट्रपति की बेटी, यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए भी भेजा
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा की बेटी के ऊपर आरोप है कि उन्होंने लोगों को धोखे से नौकरी के बहाने रूस बुलाया। इसके बाद रूस में उन्हें भाड़े के सैनिकों को सौंप कर युद्ध क्षेत्र में पहुंचा दिया।
रूस और यूक्रेन युद्ध में मॉस्को की तरफ से कई देशों के लोग युद्ध लड़ रहे हैं। इनमें से कई लोग ऐसे हैं, जो बेहतर नौकरी की तलाश में रूस आए थे और यहां आकर इन्हें धोखे से युद्ध में धकेल दिया गया। अब इस मामले के तार दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा की बेटी दुदुजिले जुमा-साम्बुडला से जुड़ा है। दक्षिण अफ्रीकी पुलिस के अनुसार दुदुजिले पर आरोप है कि उसने धोखे से 17 युवाओं को रूस भेजा और बाद में बिना उनकी सहमति के उन्हें युद्ध लड़ने के लिए मजबूर किया।
अफ्रीकी पुलिस प्रवक्ता एथलेंडा मथे के मुताबिक, जुमा-साम्बुडला की बहन न्कोसाजाना जुमा-मनक्यूब द्वारा दायर हलफनामे में आरोप लगाया गया है कि उसकी बहन ने दो अन्य लोगों के साथ मिलकर लोगों को धोखा दिया है। इन लोगों ने पुरुषों को रूस में एक सुरक्षा कंपनी में काम करने का बहाना देकर बुलाया। हलफनामे के मुताबिक रूस पहुंचने के बाद इन लोगों को रूसी भाड़े के सैनिक समूह को सौंप दिया गया। इसके बाद उन्हें हल्की ट्रेनिंग देकर युद्ध लड़ने के लिए मजबूर किया गया। दस्तावेजों के मुताबिक इन 17 में 8 पुरुष उसकी बहनों के परिवार से ही हैं।
पुलिस अधिकारी मथे ने रविवार को बताया कि पुलिस अभी इन आरोपों की जांच कर रही है, जल्दी ही इस पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, दूसरी ओर अफ्रीकी विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "पुलिस को इसकी जांच करनी चाहिए, और जो भी इसमें शामिल है उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए। स्थिति आसान नहीं है, क्योंकि वे युद्ध की अग्रिम पंक्ति में हैं, लेकिन हमें उम्मीद है कि जल्दी ही हमें इस मामले में सफलता मिलेगी।”
गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने भी इस महीने की शुरुआत में कहा था उसे 20 से 39 साल के कुछ लोगों मदद की कॉल मिली थी। यह लोग युद्धग्रस्त डोनबस क्षेत्र में फंसे हुए हैं। सरकार के मुताबिक इन लोगों को अच्छी वेतन का लालच देकर सैनिक दलों में शामिल किया गया है।
रूस पर पहले भी आरोप लगते रहे हैं कि वह दूसरे देशों के लोगों को अच्छी नौकरियों का झांसा देकर उन्हें युद्ध में लड़ने के लिए भर्ती करता है। इसके अलावा इस तरह का दावा भी किया जा रहा है कि रूस दक्षिण अफ्रीका और अन्य अफ्रीकी देशों की महिलाओं को सोशल मीडिया के ज़रिए खानपान, हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में नौकरियों का वादा करके उन्हें रूसी ड्रोन फैक्ट्रियों में काम करने के लिए फंसाता है।

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Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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