बांग्लादेश सरकार में पूर्व मंत्री रमेश चंद्र सेन की हिरासत में मौत, चुनाव से पहले गरमाया माहौल
रमेश चंद्र सेन को 16 अगस्त 2024 को ठाकुरगांव पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अदालत के आदेश पर उन्हें पहले ठाकुरगांव जिला जेल और फिर दीनाजपुर जेल में शिफ्ट किया गया। उन पर तीन मामले दर्ज थे।

बांग्लादेश अवामी लीग के नेता और पूर्व जल संसाधन मंत्री रमेश चंद्र सेन की शनिवार को दीनाजपुर जिला जेल में हिरासत के दौरान मौत हो गई। 83 वर्षीय सेन अचानक बीमार पड़ने के बाद दीनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाए गए, जहां डॉक्टरों ने स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9:29 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया। जेल अधीक्षक फरहाद सरकार ने बताया कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद शव परिवार को सौंप दिया जाएगा। यह घटना 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से महज कुछ दिन पहले हुई है, जिससे राजनीतिक कैदियों के साथ व्यवहार और हिरासत में मौतों की उपेक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
रमेश चंद्र सेन को 16 अगस्त 2024 को ठाकुरगांव पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अदालत के आदेश पर उन्हें पहले ठाकुरगांव जिला जेल और फिर दीनाजपुर जेल में शिफ्ट किया गया। उन पर तीन मामले दर्ज थे, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हुए जन विद्रोह के बाद की राजनीतिक अशांति से जुड़ा एक हत्या का आरोप भी शामिल था। उनका जन्म 30 अप्रैल 1940 को ठाकुरगांव सदर उपजिला के रुहिया यूनियन में हुआ था। उन्होंने ठाकुरगांव-1 निर्वाचन क्षेत्र से कई बार संसद सदस्य के रूप में सेवा की और अवामी लीग के प्रेसिडियम सदस्य रहे। 2024 के आम चुनाव में उन्होंने अपनी सीट जीती थी, लेकिन अंतरिम प्रशासन ने बाद में पार्टी को राजनीतिक गतिविधियों से बाहर कर दिया।
अंतरिम सरकार पर लगे गंभीर आरोप
सेन की मौत बांग्लादेश में जारी राजनीतिक तनाव को और बढ़ा रही है। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं। विपक्षी दल दावा कर रहे हैं कि पूर्व अवामी लीग नेताओं की हिरासत में होने वाली ऐसी मौतें व्यवस्थागत खामियों को उजागर करती हैं। बंदियों के लिए चिकित्सा सुविधाओं के मानकों पर सवाल उठ रहे हैं और कई लोग इसे राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा मान रहे हैं। यह घटना चुनाव पूर्व माहौल में सरकार की निष्पक्षता और जवाबदेही पर भी बहस छेड़ रही है।
क्यों यह गंभीर चिंता की वजह
रमेश चंद्र सेन एक अनुभवी राजनीतिज्ञ थे, जिनकी विरासत लंबे समय तक संसद में उनके योगदान के लिए जानी जाती है। उनकी मौत अब न्याय, शासन और कानून के शासन जैसे मुद्दों पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गई है। अवामी लीग को चुनाव से बाहर रखे जाने के बीच प्रतिद्वंद्वी दलों के बीच सत्ता की होड़ तेज है। यह हादसा राजनीतिक कैदियों के अधिकारों, हिरासत में मौतों की जांच और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गहन विचार-विमर्श को प्रेरित करेगा, जिसका असर बांग्लादेश की आगामी राजनीतिक दिशा पर पड़ सकता है।
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Niteesh Kumarलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


