PoK में भड़की बगावत की आग, पुलिस-पब्लिक में भिड़ंत; 7 की मौत, 5 दर्जन से ज्यादा घायल

लाइव हिन्दुस्तान, मुजफ्फराबाद
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Tension in PoJK: स्थानीय लोगों के बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच क्षेत्रीय सरकार ने JAAC को आतंकवाद निरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है। इसके बावजूद संगठन ने  मंगलवार को पूरे क्षेत्र में बंद का आह्वान किया है।

PoK में भड़की बगावत की आग, पुलिस-पब्लिक में भिड़ंत; 7 की मौत, 5 दर्जन से ज्यादा घायल

Tension in PoJK: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में राजनीतिक असंतोष अब हिंसक रूप ले चुका है। चुनावी व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर PoK के लोगों में भारी गुस्सा है। लोग अब सड़कों पर उतर आए हैं और पर्दर्शन कर रहे हैं। इस बीच, स्थानीय प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प की खबरें हैं, जिसमें अब तक कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 63 से अधिक लोग इस झड़प में घायल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, आंदोलनकारी संगठन Joint Army Action Committee (JAAC) के समर्थकों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर हिंसक टकराव हुआ है। झड़पों में मरने वालों में तीन नागरिकों और चार पुलिसकर्मी शामिल हैं।

पाक की मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जैसे-जैसे JAAC प्रदर्शनकारियों ने अपना आंदोलन तेज किया, क्षेत्रीय सरकार ने 'जॉइंट आर्मी एक्शन कमेटी' (JAAC) को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया। लेकिन JAAC ने अपना आंदोलन जारी रखा हुआ है। इस कार्रवाई से भड़के JAAC ने अब कल यानी (मंगलवार, 9 जून को) पूरे इलाके में हड़ताल और बंद का आह्वान किया है।

पुलिस के चार जवान मारे गए, 23 घायल

इस बीच, रावलकोट के कमिश्नर सरदार वहीद ने समाचार एजेंसी AFP को बताया कि हिंसक झड़प में तीन आम नागरिकों की मौत हुई है और 40 लोग घायल हुए हैं। AFP के मुताबिक, झड़पों में पुलिस के चार जवान भी मारे गए और 23 अन्य जवान घायल हो गए हैं। वहीं पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' ने पुलिस के हवाले से बताया कि जवानों पर आग्नेयास्तरों और शॉटगन से गोलियां चलाई गईं। इसलिए प्रशासन ने इस घटना को आतंकवादी हरकत करार दिया है। एक बयान में कहा गया है कि नागरिकों की सुरक्षा और सार्वजनिक शांति से कोई समझौता न करने का संकल्प लिया गया है।

JAAC के 70 से ज़्यादा सदस्य गिरफ्तार

बढ़ते हंगामे और बवाल के बीच अधिकारियों ने AFP को बताया कि सप्ताहांत में JAAC के 70 से ज़्यादा सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, यह जारी हिंसा इस इलाके में लंबे समय से चले आ रहे तनाव की एक और कड़ी है, जहां JAAC और अन्य समूह क्षेत्रीय और संघीय सरकारों द्वारा इलाके के प्रशासन के तरीके में कई बदलावों की मांग कर रहे हैं। सितंबर और अक्टूबर में भी बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी, जिसमें घायलों और प्रभावितों की संख्या 200 के पार पहुंच गई थी।

पूरे इलाके में विरोध प्रदर्शन का आह्वान, कल बंद

ताजा घटनाक्रम में, JAAC ने पूरे इलाके में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। उनकी मांग है कि 1947 के बाद मुख्य पाकिस्तान में बसने वाले J&K के शरणार्थियों के लिए क्षेत्रीय विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों को खत्म किया जाए। समूह का दावा है कि इन सीटों का इस्तेमाल मुख्यधारा की पाकिस्तानी पार्टियां इलाके में सरकार गठन को प्रभावित करने के लिए करती हैं। असल में, इन सीटों को खत्म करने की मांग को इलाके के लिए ज़्यादा स्वायत्तता हासिल करने के एक तरीके के तौर पर देखा जा रहा है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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