ईरान जंग के बीच फ्रांस का बड़ा फैसला, 3.5 दशक बाद पहली बार परमाणु जखीरा बढ़ाने का ऐलान; क्यों?
मैक्रों ने कहा कि यह फैसला यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लिया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और अमेरिका की सुरक्षा गारंटी को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

मध्य-पूर्व में चल रही जंग, दुनिया भर में बढ़ते तनाव और सुरक्षा चिंताओं के बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को घोषणा की कि फ्रांस अपने परमाणु हथियारों की संख्या में वृद्धि करेगा, जो पिछले कई दशकों में पहली बार होगा। हालांकि, उन्होंने इसकी कोई निश्चित संख्या नहीं बताई। वर्तमान में फ्रांस के पास परमाणु अस्त्रों की संख्या 300 से कम बताई जाती है। संभवत: वर्ष 1992 के बाद यह पहली बार होगा जब फ्रांस अपने परमाणु जखीरों में वृद्धि करेगा। मैक्रों ने उत्तर-पश्चिमी फ्रांस के ले लोंग स्थित सैन्य प्रतिष्ठान में कहा, ''मैंने अपने शस्त्रागार में युद्धक हथियारों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है।''
फ्रांसीसी राष्ट्रपति का भाषण यह स्पष्ट करने के उद्देश्य से था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बार-बार होने वाले तनाव के कारण महाद्वीप में उठाई गई चिंताओं के बीच फ्रांसीसी परमाणु हथियार यूरोप की सुरक्षा में किस प्रकार उपयुक्त बैठते हैं। मैक्रों ने यह घोषणा फ्रांस के उत्तर-पश्चिम में स्थित ल’इल लॉन्ग सैन्य अड्डा से की, जो देश की बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने बताया कि फिलहाल फ्रांस के पास 300 से कम परमाणु वारहेड्स हैं, लेकिन अब इस संख्या को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कितनी वृद्धि की जाएगी।
यूरोप की सुरक्षा पर फोकस
मैक्रों ने कहा कि यह फैसला यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लिया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और अमेरिका की सुरक्षा गारंटी को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। इस स्थिति में फ्रांस अपने परमाणु प्रतिरोध (nuclear deterrence) की भूमिका को और स्पष्ट तथा मजबूत करना चाहता है।
सहयोग और नई सैन्य रणनीति
फ्रांस ने यह भी घोषणा की है कि वह अपने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम विमानों को अस्थायी रूप से सहयोगी देशों में तैनात कर सकता है। इसके अलावा, फ्रांस अब जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम के साथ मिलकर लंबी दूरी की मिसाइल परियोजनाओं पर काम करेगा। यह कदम यूरोपीय देशों के बीच रक्षा सहयोग को और गहरा करेगा। मैक्रों का यह फैसला ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और सैन्य तनाव बढ़ रहे हैं। ऐसे में परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाना एक ओर जहां सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर यह वैश्विक हथियार होड़ की चिंता भी बढ़ा सकता है।
यह कदम केवल एक सैन्य निर्णय नहीं
फ्रांस का यह कदम केवल एक सैन्य निर्णय नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत भी है। यह दर्शाता है कि आने वाले समय में यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए अधिक आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा कि इस बढ़ते सैन्य संतुलन के बीच कूटनीति और शांति के प्रयास भी समान रूप से जारी रहें।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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