मुफ्त के होर्मुज पर लगेगी फीस, युद्ध के बाद क्या कुछ बदला; भारत के कितने जहाज फंसे
अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में युद्धविराम के बीच तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यह समझौता शर्तों के साथ हुआ है। ईरान का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से शिपिंग को युद्ध-पूर्व की स्थिति में लौटने में लंबा समय लगेगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ईरान हर दिन 15 पोत ही गुजर सकेंगे। इन पोतों को गुजरने के लिए भी ईरान की मंजूरी लेनी होगी। इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता से पहले रूसी समाचार एजेंसी तास ने वरिष्ठ ईरानी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। हाल ही में भारत का झंडा लगा एक तेल टैंकर 'ग्रीन आशा' होर्मुज को पार कर गया है। यह पोत 15,400 टन एलपीजी लेकर नवी मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी पर पहुंच गया है। कहा जा रहा है कि अब भारत के 15 जहाज होर्मुज पर अटके हुए हैं।
सूत्र ने बताया कि युद्धविराम की शर्तों के तहत ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से प्रतिदिन 15 से अधिक जहाजों को गुजरने की अनुमति नहीं देगा। बता दें कि इस जलमार्ग से गुरुवार को पोतों की आवाजाही लगभग ठप रही।
फीस भी लगेगी!
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से ईरान और ओमान फीस लेंगे। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन युद्ध के बीच ही ईरान के अधिकारी ऐसे संकेत दे चुके हैं। खास बात है कि पहले यहां से गुजरने के लिए जहाजों को फीस देने की जरूरत नहीं होती थी। कहा जा रहा है कि इससे होने वाली आय का इस्तेमाल ईरान फिर से निर्माण कार्यों के लिए करेगा।
शर्तों के साथ समझौता
अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में युद्धविराम के बीच तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यह समझौता शर्तों के साथ हुआ है। ईरान का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से शिपिंग को युद्ध-पूर्व की स्थिति में लौटने में लंबा समय लगेगा।
इन शर्तों में प्रत्येक पोत के गुजरने के लिए ईरान की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। पोतत को एक विशिष्ट प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। नया नियामक ढांचा रिवोल्यूशनरी गार्ड की देखरेख में काम करेगा। ईरानी सूत्र के अनुसार, युद्ध-पूर्व की यथास्थिति पर वापसी नहीं होगी। बता दें कि दुनिया के समुद्री कच्चे तेल के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी स्ट्रेट से होकर गुजरता है।
बीते 24 घंटे में एक टैंकर गुजरे
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को बीते 24 घंटों में एक तेल टैंकर और पांच अलग-अलग ड्राई बल्क कैरियर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरे। ईरान का झंडा लगे दो टैंकर भी होर्मुज से गुजरे।
दो सप्ताह के भीतर फ्रीज संपत्तियों को मुक्त करने की मांग
ईरान ने युद्धविराम के साथ एक वित्तीय शर्त भी जोड़ दी है। तेहरान की मांग है कि विदेशों में उसकी रुकी हुई संपत्तियों को युद्धविराम की दो सप्ताह की अवधि समाप्त होने से पहले मुक्त किया जाए। सूत्र ने कहा, ईरानी संपत्तियों को अनफ्रीज करना महत्वपूर्ण कार्यकारी गारंटी है जिसे इस समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।
तेहरान इस बात पर भी जोर दे रहा है कि युद्ध की समाप्ति को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के माध्यम से उसकी अपनी शर्तों पर औपचारिक मान्यता दी जाए। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध की समाप्ति को हमारी शर्तों के आधार पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में संबद्ध नहीं किया गया, तो हम अमेरिका और इजरायल के खिलाफ फिर से युद्ध शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
अमेरिकी सैनिकों की संख्या न बढ़ाने की शर्त
ईरान ने यह भी मांग की है कि वॉशिंगटन दो सप्ताह के युद्धविराम के दौरान क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति न बढ़ाए। यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे पर ईरानी स्रोत ने कहा कि वे आदान-प्रदान किए गए समझौते के पाठ के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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