कहीं महाशक्ति ना बन जाए ईरान, अमेरिका को सता रहा डर; समंदर में भयंकर जंग छेड़ने की है तैयारी
अमेरिका के ही अधिकारियों के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप को डर है कि कहीं ईरान वैश्विक महाशक्तियों के चौथे केंद्र के रूप में जगह ना बना ले। ऐसे में अमेरिका झुकने को तैयार नहीं होगा और वह टकराव को और बढ़ाना चाहता है।

इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका की वार्ता फेल होने के बाद पाकिस्तान बार-बार दावा कर रहा है कि अभी दूसरे दौर की वार्ता होगी। हालांकि अमेरिका और ईरान दोनों ही इस मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिका के सैन्य अधिकारियों के हवाले से कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप समंदर में और भी भयंकर युद्ध छेड़ने वाले हैं। आने वाले समय में अमेरिकी सेना सीधे ईरान और उसके सहयोगियों के जहाजों पर कब्जा कर सकते हैं। अमेरिका के सैन्य अधिकारी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि किसी भी कीमत पर ईरान का रुतबा बढ़े और भविष्य में दुनिया का चौथा स्तंभ बन जाए।
अमेरिका के पास दो ही रास्ते
अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि रास्ते केवल दो ही बचे हैं। अमेरिका ऐसे मोड़ पर आकरखड़ा हो गया है जहां से अगर वह पीछे हटता है तो ईरान वैश्विक शक्ति के मामले में चौथा केंद्र बन जाएगा। अगर यह होने से रोकना है तो टकराव बढ़ाना ही एक मात्र रास्ता है। इसलिए अमेरिका टकराव के रास्ते पर ही आगे कदम बढ़ा रहा है।
ईरान के होर्मुज बंद करने पर भड़का अमेरिका
ईरान ने पहले होर्मुज को खोलने का ऐलान किया था। हालांकि जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ नाकेबंदी नहीं हटाई तो भड़के ईरान ने होर्मुज को एकदम से बंद कर दिया। यहां तक कि पहली बार ऐसा हुआ कि ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाज पर भी गोलीबारी कर दी। अमेरिका होर्मुज पर ईरान की मजबूत दावेदारी से परेशान भी है और भड़का हुआ भी है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका अगर बातचीत करता है तो परमाणु कार्यक्रम रोकने के मामले में ईरान उसकी सारी बातें नहीं मानेगा और ऐसे में होर्मुज तभी खुलेगा जब अमेरिका झुकेगा। अमेरिका किसी भी कीमत पर झुकना नहीं चाहता और इसलिए वह टकराव बढ़ा रहा है।
ईरान भी बोला, हम युद्ध के लिए तैयार हैं
एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि ईरान खुद बातचीत के लिए संपर्क कर रहा है। दूसरी ओर ईरान ने इस बात को कभी स्वीकार नहीं किया। ईरान का कहना है कि वह युद्ध और बातचीत दोनों के लिए तैयार है। ईरान के संसद के स्पीकर गालिबाफ ने कहा कि उन्हें दुश्मन पर एकदम भरोसा नहीं है। इसके अलावा अगर वह कोई अतिवादी मांग करते हैं तो वे समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। ईरान की तरफ से कहा गया है कि बातचीत के लिए कोई तारीख निर्धारित नहीं की गई है।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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