Explainer: क्या है ईरान का माजिद एयर डिफेंस सिस्टम, अमेरिकी फाइटर प्लेन्स का बना काल; कितना घातक

Apr 04, 2026 05:10 pm ISTDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान
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Explainer: ईरान के आसमान में अमेरिकी विमान संकट में हैं। ईरान एक के बाद ट्रंप के फाइटर प्लेन्स पर निशाना साध रहा है। सवाल उठता है कि आखिर ईरान के पास वह घातक हथियार कौन सा है, जिसके दम पर वह अमेरिका को नाको चने चबवा रहा है।

क्या है ईरान का माजिद एयर डिफेंस सिस्टम, अमेरिकी फाइटर प्लेन्स का बना काल; कितना घातक

Explainer: ईरान के आसमान में अमेरिकी विमान संकट में हैं। ईरान एक के बाद ट्रंप के फाइटर प्लेन्स पर निशाना साध रहा है। सवाल उठता है कि आखिर ईरान के पास वह घातक हथियार कौन सा है, जिसके दम पर वह अमेरिका को नाको चने चबवा रहा है। इसके पीछे है माजिद सिस्टम। ईरान ने साल 2021 में इस सिस्टम का इस्तेमाल करना शुरू किया है। यह नीचे से उड़ान भरने वाले एयरक्राफ्ट को ट्रैक करता है। आइए जानते हैं आखिर क्या है यह माजिद सिस्टम और कैसे करता है काम...

राडार पर नहीं है निर्भर
माजिद एक मोबाइल डिफेंस सिस्टम है। इसे ट्रक पर लगाया जाता है। यह आसमान से आने वाले खतरों को जल्दी से पहचानता है और तुरंत मार गिराता है। यह एक ऐसा हथियार है जो दुश्मन के ड्रोन और मिसाइल को हवा में ही खत्म कर देता है। सबसे खास बात यह है कि ईरान का माजिद सिस्टम राडार पर निर्भर नहीं करता है। बल्कि यह इंफ्रारेड गाइडेंस सिस्टम पर काम करता है। यह दुश्मन के हथियार को उसकी गर्मी से ट्रैक करता है। यहां तक कि यह स्टेल्थ टारगेट पर भी सटीक निशाना लगाना में सक्षम है। इन्फ्रारेड सेंसर्स की रेंज 15 किमी तक है। यह एक बाहरी काशिफ-99 फेज्ड-एरे सिस्टम के साथ आता है, जो ट्रैकिंग क्षमता बढ़ाकर 30 किमी कर देता है।

ढूंढ-ढूंढकर मारता है
माजिद सिस्टम से मिसाइल छोड़ने के बाद कुछ करने की जरूरत नहीं। यह मिसाइल खुद टारगेट को खोजकर मारती है। यह सिस्टम ट्रक पर लगा होता है जल्दी से एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकता है। युद्ध के मैदान में सर्वाइव करने की इसकी क्षमता भी ज्यादा है। यह निचले स्तर पर उड़ान भरने वाले दुश्मन के विमानों के लिए बेहद खतरनाक है। इसकी रेंज करीब आठ से 10 किमी ऊंचाई वाली है और यह छह किमी तक निचले स्तर पर कारगर होती है।

किसके खिलाफ कारगर
ईरान का यह सिस्टम ड्रोन, हेलीकॉप्टर, नीचे से उड़ान भर रहे विमानों और क्रूज मिसाइलों के खिलाफ बेहद कारगर है। बताया है कि अमेरिका के जिन विमानों को ईरान ने मार गिराया है, वह बहुत नीचे से उड़ान भर रहे थे। इसीलिए यह माजिद सिस्टम की जद में आसानी से आ गए और शिकार बन गए। माना जा रहा है कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से माजिद सिस्टम ने कई उच्च क्षमता वाले अमेरिकी और इजरायली यूएवी, खासकर एमक्यू-9 और हेरॉन ड्रोन को नष्ट किया है।

बता दें कि अमेरिका-इजरायल के साथ संघर्षविराम की शर्तों में से एक के तौर पर ईरान अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अधिकार को मान्यता देने की मांग कर रहा है। रूस में ईरान के एक राजनयिक सूत्र ने शनिवार को यह जानकारी दी। सूत्र ने कहाकि युद्ध खत्म करने की शर्तों में हमारे क्षेत्र में स्थायी शांति शामिल है, न कि सिर्फ संघर्ष विराम। हमें पहले ही इसका कड़वा अनुभव हो चुका है। स्थायी शांति बनाए रखने के लिए एक निश्चित तंत्र में हमलावरों की निंदा करना, हर्जाना, भौतिक क्षति की भरपाई, सभी प्रतिबंध हटाना और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के लिए ईरान के अधिकारों का सम्मान करना शामिल है।

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लेखक के बारे में

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मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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