भारतीय छात्रों के बिना डगमगाए कनाडा के कॉलेज, 600 कोर्स बंद; 10 हजार नौकरियां गईं
कनाडा के कॉलेजों में भारतीय छात्रों के नामांकन में कमी के कारण 10,000 कर्मचारियों की छंटनी हुई। नई सरकारी नीति और प्रांतीय फंडिंग की कमी ने इस वित्तीय संकट को और गहरा दिया है। जानिए पूरा मामला।

कनाडा के कॉलेज भारतीय छात्रों के नामांकन में भारी गिरावट के कारण गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 10,000 कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है और 600 से अधिक लोकप्रिय कोर्स बंद या निलंबित किए गए हैं। ओंटारियो पब्लिक सर्विस एम्प्लॉइज यूनियन (OPSEU) के अनुसार यह छंटनियां शिक्षण, प्रशासनिक और सहयोगी भूमिकाओं में व्यापक स्तर पर की गई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कनाडा के कॉलेज किस हद तक अंतरराष्ट्रीय छात्रों के ट्यूशन फीस पर निर्भर हैं। खासतौर पर भारतीय छात्रों पर कनाडाई कॉलेजों की निर्भरता साफ झलक रही है।
कनाडा के कॉलेज, विशेष रूप से ऑन्टेरियो के 24 सार्वजनिक कॉलेज, लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय छात्रों, खासकर भारतीय छात्रों, की ऊंची ट्यूशन फीस पर निर्भर रहे हैं। 2023 में, ऑन्टेरियो के कॉलेजों में 60% से अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्र भारत से थे। हालांकि, कनाडा सरकार ने इस साल की शुरुआत में अध्ययन परमिट (स्टडी परमिट) पर एक सीमा लागू की, जिसका उद्देश्य आवास और सार्वजनापरक सेवाओं पर दबाव को कम करना था। इस नीति के परिणामस्वरूप नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में 48% की गिरावट देखी गई, जिसमें भारतीय छात्र सबसे अधिक प्रभावित हुए। इस नीति के परिणामस्वरूप कॉलेजों की वित्तीय स्थिति डगमगा गई है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय छात्रों की आमद में तेज गिरावट देखी गई है। इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के आंकड़ों के अनुसार, 2025 की पहली तिमाही में भारतीय नागरिकों को 31% कम स्टडी परमिट जारी किए गए, जो पिछले साल की समान अवधि में 44,295 से घटकर 30,650 हो गए।
भारतीय छात्र सबसे अधिक प्रभावित
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कई कॉलेजों, खासकर ओंटारियो प्रांत में भारतीय छात्र अंतरराष्ट्रीय छात्र आबादी का आधे से अधिक हिस्सा थे और ट्यूशन फीस के प्रमुख स्रोत भी। उनकी अनुपस्थिति ने कॉलेजों के बजट में गहरा छेद कर दिया है। OPSEU अध्यक्ष जेपी हॉर्निक के अनुसार, “अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कमी कॉलेज स्टाफ पर विनाशकारी असर डाल रही है।” कॉलेजों ने इसके जवाब में कई कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं, पाठ्यक्रमों की संख्या घटाई है और स्टाफ की छंटनी की है। सरकार से मिलने वाली फंडिंग पहले ही स्थिर थी, और अब यह नया झटका कॉलेजों के लिए भारी साबित हो रहा है।
इस वित्तीय संकट के कारण कॉलेजों को कई कठोर कदम उठाने पड़े हैं। OPSEU के अनुसार, 19 कॉलेजों ने जून 2025 तक 8,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी की सूचना दी, और यह संख्या 10,000 तक पहुंचने की संभावना है। इसके अलावा, 600 से अधिक कॉलेज प्रोग्राम रद्द या निलंबित किए गए हैं, जिनमें से कई अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच लोकप्रिय थे। OPSEU के अध्यक्ष जेपी हॉर्निक ने टोरंटो के सेंटेनियल कॉलेज के स्टोरी आर्ट्स सेंटर कैंपस के बाहर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हम ऑन्टेरियो के इतिहास में सबसे बड़े सामूहिक छंटनी के दौर से गुजर रहे हैं। यह हडसन बे की 8,000 कर्मचारियों की छंटनी से भी बड़ा है।"
ट्यूशन फीस पर अत्यधिक निर्भरता
ओंटारियो के 24 सार्वजनिक कॉलेज सीमित प्रांतीय फंडिंग की भरपाई अंतरराष्ट्रीय छात्रों से मिलने वाले ट्यूशन फीस से कर रहे थे। अब जब भारतीय छात्रों का नामांकन गिर गया है, तो पूरी प्रणाली वित्तीय अस्थिरता की स्थिति में पहुंच गई है। OPSEU ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने आपातकालीन सहायता नहीं दी, तो आने वाले महीनों में और स्टाफ की छंटनी और कार्यक्रमों में कटौती हो सकती है। यूनियन ने कनाडा की केंद्रीय और प्रांतीय सरकारों से पोस्ट-सेकेंडरी शिक्षा में निवेश बढ़ाने की अपील की है ताकि कॉलेजों की बुनियादी ढांचा और रोज़गार सुरक्षित रह सके।
निजी कॉलेजों से साझेदारी पर भी सवाल
यह संकट उस वक्त और गहरा गया है जब कनाडा के कई सरकारी कॉलेजों ने अंतरराष्ट्रीय नामांकन बढ़ाने के लिए निजी संस्थानों के साथ साझेदारी की थी। इन निजी संस्थानों की निर्भरता भारतीय छात्रों पर बहुत अधिक थी, और अब फेडरल कैप के कारण ये संस्थान भी परिचालन संकट में हैं। इन साझेदारियों में शैक्षणिक गुणवत्ता और छात्र सहायता पर निगरानी की कमी को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अब जब स्टडी परमिट की सीमा लागू हो चुकी है, तो इन साझेदारियों की नींव भी हिल गई है।
भविष्य अनिश्चित, OPSEU की मांग जारी
भारतीय छात्रों की घटती संख्या ने कनाडा के कॉलेज क्षेत्र में गंभीर आर्थिक और रोजगार संकट उत्पन्न कर दिया है। लगभग 10,000 नौकरियों की छंटनी के साथ-साथ कई कार्यक्रमों को या तो बंद किया गया है या सीमित कर दिया गया है। OPSEU लगातार यह मांग कर रही है कि सरकार फंडिंग अंतर को दूर करे और इस क्षेत्र को स्थिर बनाए, ताकि और छंटनियों और कार्यक्रमों की कटौती को रोका जा सके। यूनियन ने स्पष्ट कहा है, “सार्वजनिक शिक्षा में पुनर्निवेश करना जरूरी है ताकि कॉलेजों के ढांचे और स्टाफ स्तर पर दीर्घकालिक क्षति से बचा जा सके।” यह संकट केवल कनाडा की शिक्षा व्यवस्था के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय छात्रों और उनके सपनों के लिए भी एक बड़ा झटका है।
लेखक के बारे में
Amit Kumarडिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।
अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
और पढ़ेंलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


