ट्रंप को उनकी ही भाषा में जवाब देंगे ये देश, टैरिफ लगाने से बुरी तरह भड़क गए
ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण का विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात कही गई। अब घोषणा से नाराज यूरोपीय नेताओं और राजनयिकों ने चेतावनी दी है कि यह कदम अमेरिका-यूरोप संबंधों को कमजोर कर सकता है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ यूरोपीय संघ ऐक्शन की योजना बना रहा है। खबर है कि रविवार को इस संबंध में बैठक भी हुई थी। इस बैठक के दौरान ट्रंप को सहयोगियों पर टैरिफ लगाने से रोकने या अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने पर चर्चा की गई। खास बात है कि अमेरिका ने हाल ही में 8 EU देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है।
क्या ऐक्शन ले सकता है यूरोपीय संघ
ईयू नेता गुरुवार को ब्रुसेल्स में होने वाले शिखर सम्मेलन में विकल्पों पर विचार करेंगे। इनमें एक अमेरिकी आयात पर 93 बिलियन यूरो (107.7 बिलियन डॉलर) का पैकेज लगाना है, जो 6 महीने के निलंबन के बाद अपने आप ही 6 फरवरी से शुरू हो जाएगा।
दूसरा ACI यानी एंटी कोएर्शियन इंस्ट्रूमेंट है। इसके तहत पब्लिक टेंडर्स, निवेश या बैंकिंग के कामों में पहुंच को सीमित कर सकता है। साथ ही डिजिटल सेवाओं समेत सेवाओं के व्यापार पर रोक लगा सकता है, जिनमें अमेरिका उस समूह के मुकाबले मुनाफे में है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि टैरिफ पैकेज के उपाय को ज्यादा समर्थन मिलता दिख रहा है।
यूरोपीय संघ के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि सदस्यों के साथ बातचीत में उन्हें डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रति समर्थन नजर आया है।
ग्रीनलैंड मुद्दे पर ट्रंप के खिलाफ होता ईयू
ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण का विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात कही गई। अब घोषणा से नाराज यूरोपीय नेताओं और राजनयिकों ने चेतावनी दी है कि यह कदम अमेरिका-यूरोप संबंधों को कमजोर कर सकता है। साथ ही चेताया है कि ये एक 'खतरनाक नकारात्मक दौर' को जन्म दे सकता है।
ट्रंप ने शनिवार को घोषणा की थी कि डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा। नाटो गठबंधन में शामिल डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को ट्रंप अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम मानते हैं और वह लगातार इसका नियंत्रण लेने की बात करते रहे हैं।
चीन को मिल सकता है फायदा
EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने हाल ही में कहा कि अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते मतभेदों का लाभ चीन और रूस को मिलेगा। कालास ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'यदि ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर खतरा है तो इसे नाटो गठबंधन के भीतर सुलझाया जा सकता है। इस तरह शुल्क लगाने से यूरोप और अमेरिका दोनों गरीब होंगे और साझा समृद्धि कमजोर होगी।'
ट्रंप के इस कदम की अमेरिका में भी आलोचना हुई है। अमेरिकी सीनेटर मार्क केली ने कहा कि सहयोगी देशों पर शुल्क लगाने से अमेरिकियों को अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी और अमेरिका की वैश्विक साख को नुकसान होगा। यूरोप में ट्रंप की करीबी सहयोगी मानी जाने वाली इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी इस फैसले को एक 'गलती' बताया।
वहीं, ब्रिटेन में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों ने समान रूप से इस कदम की आलोचना की। ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने कहा कि यूरोप के देशों पर शुल्क की घोषणा 'पूरी तरह गलत' है और उनकी सरकार इस मामले को अमेरिकी प्रशासन के समक्ष उठाएगी।

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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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