हिंदू लड़कियों का जबरन निकाह, पाकिस्तान पर भड़की यूरोपीय संसद; 13 साल की मारिया का जिक्र
यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू और ईसाई लड़कियों के जबरन धर्मांतरण, अपहरण और बाल विवाह के खिलाफ कड़ा प्रस्ताव पास कर फटकार लगाई है। UN के आंकड़ों से खुली पाकिस्तान की पोल।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के साथ हो रहे जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह के मामलों पर यूरोपीय संसद ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान में युवा लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह की कड़ी निंदा की है। साथ ही पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि वह धार्मिक अल्पसंख्यकों से ताल्लुक रखने वाली लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए।
क्या है 13 साल की मारिया का मामला?
यूरोपीय संसद ने अपने प्रस्ताव में मुख्य रूप से 13 साल की पाकिस्तानी ईसाई लड़की मारिया शाहबाज के मामले को प्रमुखता से उठाया है। मारिया का अपहरण कर उसे जबरन इस्लाम कुबूल करवाया गया और इसी साल मार्च में उसके अपहरणकर्ता के साथ ही उसकी जबरन शादी करा दी गई। यूरोपीय सांसदों ने मांग की है कि मारिया को उचित कानूनी मदद मिले, उसे अपने परिवार से मिलने की इजाजत दी जाए और मनोवैज्ञानिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाए।
संसद ने स्पष्ट किया है कि मारिया का यह मामला कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे मानवाधिकारों के व्यापक उल्लंघन का एक जीता-जागता उदाहरण है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) के डराने वाले आंकड़े
इस प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र के 2025 के आंकड़ों का हवाला देते हुए पाकिस्तान की पोल खोली गई है। इन आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में शादी के जरिए जबरन धर्मांतरण का शिकार होने वाली महिलाओं और लड़कियों में लगभग 75% हिंदू होती हैं। वहीं, शिकार होने वाली करीब 25% लड़कियां ईसाई समुदाय से ताल्लुक रखती हैं।
पाकिस्तान सरकार से यूरोपीय संसद की मुख्य मांगें
प्रस्ताव के जरिए पाकिस्तान प्रशासन से कुछ बेहद सख्त कदम उठाने की मांग की गई है।
- अगवा की गई या जबरन धर्मांतरण का शिकार हुई अल्पसंख्यक लड़कियों के परिवारों की शिकायतें सुनने और उनका निपटारा करने के लिए एक 'राष्ट्रीय तंत्र' बनाया जाए।
- देश में बाल विवाह को पूरी तरह से खत्म करने के लिए राष्ट्रीय ढांचे को सख्ती से लागू किया जाए।
- यूरोपीय सांसदों ने मांग की है कि नाबालिगों और जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े सभी मामलों की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच हो।
- दोषियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाए, पाकिस्तान के न्यायिक ढांचे को मजबूत किया जाए और अगवा की गई लड़कियों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाए।
अदालत से भी परिवार को लगा था झटका
मानवाधिकार समूह 'ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान' (HRFP) ने भी इस मामले में गहरी चिंता जाहिर की है। संगठन के मुताबिक, लाहौर की रहने वाली मारिया का 29 जुलाई, 2025 को अपहरण किया गया था। बाद में उसे एक मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर यह बयान दर्ज कराया गया कि उसने अपनी मर्जी से धर्म बदलकर एक 30 साल के व्यक्ति से शादी की है।
हैरानी की बात यह है कि सरकारी दस्तावेजों में लड़की के नाबालिग होने की पुष्टि होने के बावजूद, फेडरल कॉन्स्टीट्यूशनल कोर्ट ने मार्च में इस शादी को बरकरार रखते हुए आरोपी को उसकी कस्टडी सौंप दी थी। फिलहाल मारिया अभी भी आरोपी के कब्जे में है, जबकि उसका परिवार लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। HRFP का कहना है कि यह पाकिस्तान में हिंदू और ईसाई अल्पसंख्यक लड़कियों के अपहरण और जबरन शादी के सुनियोजित पैटर्न का ही एक हिस्सा है।


