पाकिस्तान को धक्के मारकर निकाल देगा यूरोप, काली करतूतों को बंद करने की दे दी वार्निंग
यूरोपीय सांसदों ने पाकिस्तान में लगातार खराब होते जमीनी हालातों पर चिंता जताई है। साथ ही पाकिस्तान को चेतावनी भी दे दी है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

पाकिस्तान के लिए अपनी ही फजीहत करवाना कोई नई बात नहीं है। अब हाल ही में उसे यूरोप की संसद से वार्निंग मिल गई है। हाल यह है कि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो यूरोप जल्द ही अपने बाजारों से पाकिस्तान को धक्के मारकर निकाल सकता है। हाल ही में यूरोपीय सांसदों ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा है कि अगर पाकिस्तान ने अपने देश में मानवाधिकारों की बदतर होती स्थिति को तुरंत नहीं सुधारा, तो उसे यूरोपीय संघ (EU) से मिलने वाले फायदों से हाथ धोना पड़ेगा।
दरअसल यूरोप ने अब तक पाकिस्तान को विशेष व्यापारिक लाभ यानी GSP+ का दर्जा दे रखा था। हालांकि अब पाकिस्तान की असलियत देख यूरोप इस पर दोबारा विचार कर रहा है। वहीं आर्थिक तंगी से बदहाल पाकिस्तान के लिए यूरोपीय संघ उसका सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन है। ऐसे में यह चेतावनी पाकिस्तान की मुश्किलों को और बढ़ा सकती है।
क्या है GSP+?
GSP+ यूरोपीय संघ का एक खास कार्यक्रम है। इसके तहत विकासशील देशों को यूरोपीय बाजारों में टैक्स-फ्री या बेहद कम टैरिफ पर व्यापार करने की इजाजत मिलती है। हालांकि यह दर्जा मुफ्त में नहीं मिलता। इसके बदले में संबंधित देश को मानवाधिकार, पर्यावरण और सुशासन से जुड़ी 27 अंतरराष्ट्रीय संधियों को पूरी तरह लागू करना होता है। पाकिस्तान को यूरोप से यह दर्जा 2014 में मिला था। GSP+ का दर्जा मिलने के बाद से यूरोपीय संघ को होने वाले पाकिस्तानी निर्यात में भारी बढ़ोतरी हुई है। अब अगर यह दर्जा छिनता है, तो पाकिस्तान का टेक्सटाइल सेक्टर पूरी तरह बर्बाद हो सकता है।
क्यों नाराज हुआ यूरोप?
यूरोपीय सांसदों ने पाकिस्तान में लगातार खराब होते जमीनी हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संसद में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि बलूचिस्तान जैसे अशांत इलाकों में लोगों को गैर-कानूनी तरीके से गायब किया जा रहा है और पाकिस्तानी सरकार को इस पर एक्शन लेना होगा। वहीं प्रस्ताव में राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों, अल्पसंख्यकों और नागरिकों के खिलाफ ईशनिंदा, आतंकवाद विरोधी और साइबर क्राइम से जुड़े कानूनों के दुरुपयोग पर तुरंत लगाम लगाने की बात कही गई है।
यूरोपीय संसद ने अपने प्रस्ताव में पाकिस्तान में मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले कुछ प्रमुख चेहरों का खास तौर से जिक्र किया। सांसदों ने बलूच अधिकार कार्यकर्ता माहरंग बलूच और मानवाधिकार वकील इमान मजारी के खिलाफ जारी कार्रवाई को तुरंत खत्म करने की मांग की। इसके अलावा अली वजीर, हनीफ पश्तीन और दाद शाह जैसे नामों का हवाला देते हुए उनके लिए न्याय और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया की मांग की गई।
पाकिस्तान पर कितना बड़ा खतरा?
हालांकि इस राजनीतिक प्रस्ताव के पारित होने से पाकिस्तान का GSP+ दर्जा तुरंत निलंबित नहीं होगा, लेकिन यह यूरोपीय आयोग की तरफ से एक बड़ा संकेत है। यूरोपीय संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी 'EU-Pakistan GSP+ मॉनिटरिंग डायलॉग' में इन चिंताओं को केंद्र में रखा जाएगा। अगर पाकिस्तान ने ठोस सुधार नहीं दिखाए, तो यूरोपीय बाजार के दरवाजे उसके लिए बंद हो सकते हैं।
लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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