
अल-कायदा और हमास जैसी आतंकी लिस्ट में होंगे ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स, ऐक्शन में यूरोपीय संघ
यूरोपीय संघ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर हुए क्रूर दमन के दौरान 6373 लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन घोषित किया जाना चाहिए
ईरान पर यूरोपीय संघ बड़ा ऐक्शन लेने जा रहा है। संघ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर हुए क्रूर दमन के दौरान 6,373 लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन घोषित किया जाना चाहिए। बता दें कि इस फैसले के लिए यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देशों की सर्वसम्मति आवश्यक होगी। अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है तो रिवोल्यूशनरी गार्ड को अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और हमास जैसे आतंकी संगठनों की श्रेणी में आ जाएगा।
गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में काजा कल्लास ने कहा कि अगर कोई आतंकवादी की तरह काम करता है, तो उसके साथ आतंकवादी की तरह ही व्यवहार किया जाना चाहिए। एस्टोनिया की पूर्व प्रधानमंत्री रह चुकीं कल्लास ने कहा कि यह कदम एक स्पष्ट संदेश देगा कि जनता पर दमन की कीमत चुकानी पड़ेगी और ऐसे कृत्यों को दंड से मुक्त नहीं रखा जाएगा।
हालांकि इससे पहले फ्रांस ने इस कदम पर आपत्ति जताई थी। पेरिस को आशंका थी कि इससे ईरान में हिरासत में लिए गए फ्रांसीसी नागरिकों और वहां मौजूद राजनयिक मिशनों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। ये मिशन ईरान और यूरोप के बीच संवाद के सीमित माध्यमों में से एक हैं। हालांकि, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार्यालय ने संकेत दिया है कि फ्रांस अब इस प्रस्ताव का समर्थन करता है।
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने ब्रुसेल्स में विदेश मामलों की परिषद की बैठक के दौरान कहा कि फ्रांस ईरान पर और सख्त प्रतिबंध लगाने और रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी सूची में शामिल करने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि ईरान में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर किया गया दमन असहनीय है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बता दें कि ईरान को रूस का करीबी सहयोगी माना जाता है और उस पर यूक्रेन युद्ध में रूस को हथियार आपूर्ति करने के आरोप भी लगे हैं, हालांकि तेहरान इन आरोपों से इनकार करता रहा है। रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने की स्थिति में यूरोपीय संघ ईरान पर दबाव और बढ़ा सकता है।
गौरतलब है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य इकाई मानी जाती है और देश की राजनीतिक व आर्थिक संरचना में उसकी अहम भूमिका है। इसकी स्थापना 1979 में इस्लामिक क्रांति की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी। यह नियमित सेना से अलग काम करती है और सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रति जवाबदेह है।

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