एपस्टीन केस से ब्रिटेन में सियासी भूचाल, PM स्टार्मर के चीफ ऑफ स्टाफ ने छोड़ा पद

Feb 09, 2026 12:50 am ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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डाउनिंग स्ट्रीट के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने अपने बयान में कहा कि गहन विचार-विमर्श के बाद मैंने सरकार से इस्तीफा देने का फैसला किया है। पीटर मैंडेलसन को नियुक्त करने का निर्णय गलत था। उन्होंने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री को यह नियुक्ति करने की सलाह दी थी और मैं पूरी जिम्मेदारी लेता हूं।

एपस्टीन केस से ब्रिटेन में सियासी भूचाल, PM स्टार्मर के चीफ ऑफ स्टाफ ने छोड़ा पद

एपस्टीन विवाद ने ब्रिटिश राजनीति को हिला दिया है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के सबसे करीबी सलाहकार और चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने रविवार को इस्तीफा दे दिया। यह फैसला पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाने के घोटाले के कारण हुआ, जिनके जेफरी एपस्टीन से गहरे संबंध सामने आए हैं। यह घटना स्टारमर सरकार के लिए सबसे बड़ा संकट बन गई है। मैकस्वीनी, जो स्टारमर की 2024 की चुनावी जीत के मुख्य वास्तुकार माने जाते थे, ने बयान में कहा कि मैंडेलसन की नियुक्ति 'गलत' थी और इससे पार्टी, देश तथा राजनीति में विश्वास को गहरा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने अपनी सलाह की पूरी जिम्मेदारी ली और इस्तीफा दिया।

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डाउनिंग स्ट्रीट के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने अपने बयान में कहा कि गहन विचार-विमर्श के बाद मैंने सरकार से इस्तीफा देने का फैसला किया है। पीटर मैंडेलसन को नियुक्त करने का निर्णय गलत था। इससे हमारी पार्टी, हमारे देश और राजनीति में विश्वास को गहरा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आगे कहा कि मैंने प्रधानमंत्री को यह नियुक्ति करने की सलाह दी थी और मैं उस सलाह की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं।

यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब विदेश मंत्रालय ने मैंडेलसन को दिए जाने वाले निकास भुगतान (सेवा समाप्ति भुगतान) की समीक्षा शुरू कर दी है। पिछले सितंबर में स्टारमर ने एपस्टीन से उनकी दोस्ती के कारण मैंडेलसन को राजदूत पद से बर्खास्त कर दिया था। संडे टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटिश राजनीति और लेबर पार्टी में दशकों से प्रभावशाली रहे मैंडेलसन को पद संभालने के महज सात महीनों में अनुमानित 38750 से 55000 पाउंड का भुगतान मिला।

वहीं, अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा 30 जनवरी को जारी दस्तावेजों से पता चलता है कि मैंडेलसन ने कथित तौर पर ब्रिटेन के मंत्री रहते हुए 2008 के वित्तीय संकट के दौरान, फाइनेंसर एपस्टीन को ब्रिटेन सरकार की गोपनीय जानकारी लीक की थी। इस खुलासे ने स्टारमर पर भारी दबाव बढ़ा दिया है और सार्वजनिक पद पर कथित कदाचार के आरोप में 72 वर्षीय मैंडेलसन के खिलाफ पुलिस जांच शुरू हो गई है। विदेश कार्यालय ने बयान में कहा कि अब सामने आई अतिरिक्त जानकारी और चल रही पुलिस जांच के मद्देनजर मैंडेलसन के सेवा समाप्ति भुगतान की समीक्षा शुरू की गई है। कैबिनेट मंत्री पैट मैकफैडेन ने पहले कहा था कि मैंडेलसन की नियुक्ति स्टारमर की 'भयानक गलती' थी, लेकिन उन्हें पद पर बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि एपस्टीन से संबंधों की सीमा जानते हुए भी मैंडेलसन ने खुद को इस पद के लिए आगे बढ़ाया, जिसके लिए वे पूरी तरह जिम्मेदार हैं।

संडे टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, स्टारमर के डिप्टी डेविड लैमी पहले कैबिनेट मंत्री बने हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री से खुद को अलग करने का संकेत दिया है। रिपोर्ट में लैमी के दोस्तों के हवाले से कहा गया कि उप प्रधानमंत्री मैंडेलसन की एपस्टीन से ज्ञात दोस्ती के कारण उनकी नियुक्ति के पक्ष में नहीं थे। स्टारमर की लेबर पार्टी ने करीब 18 महीने पहले भारी चुनावी जीत के साथ सत्ता संभाली थी। लेकिन अब यह नाइजल फराज की आप्रवासी-विरोधी पार्टी 'रिफॉर्म यूके' से पिछड़ रही है, क्योंकि सरकार आप्रवासन, आर्थिक विकास और जीवनयापन की लागत के संकट पर आलोचनाओं का सामना कर रही है। पिछले एक साल से रिफॉर्म यूके चुनावों में दोहरे अंकों की बढ़त बनाए हुए है।

यूरोपीय संघ के पूर्व व्यापार आयुक्त मैंडेलसन ने इस सप्ताह की शुरुआत में संसद के गैर-निर्वाचित ऊपरी सदन, हाउस ऑफ लॉर्ड्स से इस्तीफा दे दिया। पूर्व राजदूत उन कई प्रमुख हस्तियों में से एक हैं, जिन्हें पिछले सप्ताह एपस्टीन से संबंधों के नए खुलासों से शर्मिंदगी उठानी पड़ी। एपस्टीन की 2019 में जेल में यौन तस्करी के आरोपों का सामना करते हुए मौत हो गई थी, जिसे अमेरिकी अधिकारियों ने आत्महत्या करार दिया था।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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