
हादी के हत्यारों को भारत से लाओ, वरना पूरे बांग्लादेश को... इंकलाब मंच की यूनुस सरकार को खुली चेतावनी
सिंगापुर जनरल अस्पताल में छह दिन जीवन-मृत्यु से जूझने के बाद 18 दिसंबर की रात हादी ने दम तोड़ दिया। बाद में इंकलाब मंच ने फेसबुक पोस्ट में उनकी मौत की पुष्टि करते हुए उन्हें शहीद करार दिया।
बांग्लादेश की राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। जुलाई विद्रोह के प्रमुख नेता और इंकलाब मंच के संयोजक शरीफ उस्मान हादी की सिंगापुर में मौत के बाद देशभर में प्रदर्शन भड़क उठे हैं। इस बीच इंकलाब मंच ने चेतावनी दी है कि अगर हादी पर गोली चलाने वाले हमलावरों को जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया तो पूरे देश को ठप्प कर दिया जाएगा। संगठन ने शाहबाग चौराहे पर अनिश्चितकालीन धरना देने और देशव्यापी आंदोलन की धमकी दी है।
गुरुवार को फेसबुक पर जारी एक बयान में इंकलाब मंच ने कहा कि 'अगर शरीफ उस्मान हादी अपनी चोटों से उबर नहीं पाते और शहीद होते हैं, तो यह आंदोलन देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए शुरू किया जाएगा।' संगठन ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारी तब तक शाहबाग में डटे रहेंगे, जब तक हमलावरों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया जाता।
संगठन ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो पूरे देश को ठप किया जा सकता है। बयान में कहा गया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और न्याय सुनिश्चित करने की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
आरोपी भारत भाग गए?
इंकलाब मंच ने दावा किया कि यदि इस हमले के आरोपी भारत भाग गए हैं, तो बांग्लादेश सरकार को भारतीय अधिकारियों से हर कीमत पर बातचीत कर उनकी वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए। संगठन का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा हुआ है।
बयान के अंत में इंकलाब मंच ने कहा- हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह शरीफ उस्मान हादी को लंबी और बरकत भरी जिंदगी अता करें। इस बयान के कुछ ही घंटों बाद सिंगापुर से खबर आई कि हादी की मौत हो गई है। इसके बाद से ही पूरे बांग्लादेश, खासतौर से राजधानी ढाका में भीड़ हिंसा पर उतारू है। कम से कम दो अखबारों के दफ्तर को आग के हवाले कर दिया है।
हमले की घटना और हादी की मौत
12 दिसंबर को ढाका के पलटन इलाके में दिनदहाड़े शरीफ उस्मान हादी पर बाइक सवार हमलावरों ने गोली चला दी थी। हादी रिक्शे पर सवार थे और जुमे की नमाज अदा करके लौट रहे थे। हमलावरों ने उनके सिर में गोली मारी, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई। पहले ढाका के एवरकेयर अस्पताल में इलाज के बाद उन्हें बेहतर उपचार के लिए सिंगापुर ले जाया गया। सिंगापुर जनरल अस्पताल में छह दिन जीवन-मृत्यु से जूझने के बाद 18 दिसंबर की रात हादी ने दम तोड़ दिया। बाद में इंकलाब मंच ने फेसबुक पोस्ट में उनकी मौत की पुष्टि करते हुए उन्हें शहीद करार दिया।
अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने भी हादी की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की। हादी जुलाई 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के प्रमुख चेहरों में से एक थे, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को उखाड़ फेंका था। वे ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में आगामी संसदीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। हादी भारत विरोधी और हसीना विरोधी बयानों के लिए जाने जाते थे।

लेखक के बारे में
Amit Kumarडिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।
अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
और पढ़ेंलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




