मिस्र में महिला एंकर सारा खलीफा समेत 12 लोगों को फांसी की सजा, हैरान कर देगी वजह

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मिस्र के अदालत ने यह फैसला पिछले महीने सुनाया था, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अब हुई है। मिस्र में मौत की सजा के मामलों में अदालत को देश के ग्रैंड मुफ्ती से धार्मिक राय लेना जरूरी होता है। इसी कानूनी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अदालत के फैसले की पुष्टि की गई

 Egyptian TV presenter Sarah Khalifa
टीवी प्रेजेंटर सारा खलीफा समेत 12 लोगों को मौत की सजा (फोटो - सारा खलीफा इंस्टा)

मिस्र की एक अदालत ने टीवी प्रेजेंटर सारा खलीफा समेत 12 लोगों को ड्रग्स से जुड़े मामले में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट के मुताबिक, ये सभी लोग एक आपराधिक गिरोह का हिस्सा थे। यह गिरोह ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री विदेश से मंगाता था और बाद में उनसे नशीली दवाएं तैयार कर उन्हें बेचता था। जांच के दौरान इनके पास गैरकानूनी हथियार और गोलियां भी बरामद हुई थीं।

12 लोगों को फांसी की सजा

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र के सरकारी अखबार अल-अहराम के हवाले से यह जानकारी दी है। अदालत ने यह फैसला पिछले महीने सुनाया था, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अब हुई है। मिस्र में मौत की सजा के मामलों में अदालत को देश के ग्रैंड मुफ्ती से धार्मिक राय लेना जरूरी होता है। इसी कानूनी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अदालत के फैसले की पुष्टि की गई।

ट्रायल के दौरान क्या सामने आया

सुनवाई के दौरान अदालत को पता चला कि अधिकारियों ने 750 किलो से ज्यादा नशीली दवाएं जब्त की थीं। इसके अलावा, ड्रग्स बनाने के लिए विदेश से मंगाया गया कच्चा माल भी बरामद किया गया था। इस मामले में 20 गवाहों ने सरकारी वकील के सामने अपने बयान दर्ज कराए। जांच के दौरान मिले इलेक्ट्रॉनिक सबूतों में बातचीत के रिकॉर्ड और वीडियो क्लिप भी शामिल थे।

अदालत ने आरोपियों को ड्रग्स की तस्करी और बलात्कार का दोषी ठहराया। हालांकि, ये ऐसे अपराध थे जो जानबूझकर हत्या करने की श्रेणी में नहीं आते। अंतरराष्ट्रीय कानून और मानकों के मुताबिक, ऐसे मामलों में मौत की सजा का इस्तेमाल सीमित होना चाहिए।

सारा खलीफा कौन हैं?

39 साल की सारा खलीफा मिस्र की टीवी प्रेजेंटर हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। वह अपने टीवी कार्यक्रम ‘मिशन इम्पॉसिबल’ के लिए जानी जाती हैं। इस कार्यक्रम में अपराध से जुड़े मामलों और मुद्दों पर चर्चा की जाती थी। पिछले साल सितंबर में हुई अदालत की सुनवाई के दौरान जज ने सारा खलीफा से मामले में उनकी कथित भूमिका को लेकर सवाल किए। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी ड्रग्स नहीं देखे थे। उनका कहना था कि उन्होंने पहली बार ड्रग्स तब देखे, जब एंटी-नारकोटिक्स अथॉरिटी के दफ्तर में उनके साथ फोटो खींची गई थी। एमनेस्टी इंटरनेशनल की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, मिस्र की अदालतों ने उस साल 492 लोगों को मौत की सजा सुनाई थी। वहीं, 23 लोगों को फांसी दी गई।

Rajat Kumar

लेखक के बारे में

Rajat Kumar

रजत कुमार, बीते आठ सालों से पत्रकारिता कर रहा हूं। मैंने, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की है और भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। अपने आठ साल के पत्रकारिता करियर में मैंने, प्रभात खबर, इंडिया टुडे और मनीकंट्रोल के डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ काम किया है। फिलहाल, लाइव हिंदुस्तान के साथ अपने पत्रकारिता के सफर को आगे बढ़ा रहा हूं।

आम लोगों की कहानियां लिखना और उन्हें सुनाना बेहद पंसद है। बीते आठ सालों से ऐसी कई कहानियों को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश जारी है। पत्रकारिता के इस सफर में दो लोकसभा चुनाव और पांच से अधिक विधानसभा चुनाव को कवर करने का भी मौका मिला है। चुनावी रिपोर्टिंग के साथ-साथ जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की पत्रकाारिता भी जारी है। राजनीति, क्रिकेट, सिनेमा और इतिहास पसंदीदा विषय रहे हैं। इस विषयों पर लिखना- पढ़ना जारी है।

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