
भारत पर 50 फीसदी लगाने वाला US टैरिफ से कितना कमा रहा, ट्रंप ने बताया
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका अगर भारत से आने वाली वस्तुओं पर आयात शुल्क और बढ़ाता है, तो इससे देश का निर्यात गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। हालांकि इससे निर्यातकों को अपने विदेशी बाजारों में विविधता लाने में मदद मिल सकती है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर रूसी तेल का मुद्दा उठाया और भारत पर नए टैरिफ लगाने के संकेत दिए हैं। अमेरिका ने पहले ही भारत पर सबसे ज्यादा 50 फीसदी शुल्क लगाया है। इस दौरान उन्होंने अमेरिका को टैरिफ के चलते हो रही कमाई का भी ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि इससे कितने अरब डॉलर अमेरिकी खजाने में जमा होंगे।
ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अमेरिका को टैरिफ में 600 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के देशों पर लगाए गए शुल्कों के कारण अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में और आर्थिक रूप से "कहीं अधिक मजबूत" है।
ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, 'हम टैरिफ में जल्द ही 600 अरब डॉलर से अधिक प्राप्त करेंगे, लेकिन फेक न्यूज मीडिया इस बारे में बात करने से इनकार कर देता है क्योंकि वे हमारे देश से नफरत करते हैं और उनका अनादर करते हैं, और आगामी टैरिफ फैसले में हस्तक्षेप करना चाहते हैं, जो अमेरिका के उच्चतम न्यायालय के अब तक के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक है।'
उन्होंने कहा कि अमेरिका आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से टैरिफ के कारण पहले से कहीं अधिक मजबूत और सम्मानित है।
वाइट हाउस में अपने दूसरे कार्यकाल के कुछ महीनों के भीतर, ट्रंप ने पिछले साल दुनिया भर के देशों से आयात पर कई टैरिफ की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिका के साथ गलत व्यवहार किया गया है और अन्य देश अमेरिकी उत्पादों पर कहीं अधिक टैरिफ लगा रहे हैं। ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जिसमें रूसी तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत टैरिफ भी शामिल है।
निर्यात पर पड़ सकता है असर
पीटीआई भाषा के अनुसार, एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका अगर भारत से आने वाली वस्तुओं पर आयात शुल्क और बढ़ाता है, तो इससे देश का निर्यात गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। हालांकि इससे निर्यातकों को अपने विदेशी बाजारों में विविधता लाने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों ने आगे कहा कि जैसे-जैसे शुल्क का खतरा गहरा रहा है, भारत को रूसी तेल के मुद्दे पर एक स्पष्ट निर्णय लेना होगा। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने सोमवार को कहा कि मई और नवंबर 2025 के बीच अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में पहले ही 20.7 प्रतिशत की गिरावट आई है और अगर शुल्क आगे भी बढ़ा तो यह गिरावट तेज हो सकती है।
निर्यातकों के शीर्ष निकाय फियो ने भी कहा कि मौजूदा 50 प्रतिशत शुल्क के अतिरिक्त कोई भी वृद्धि भारतीय निर्यात को बुरी तरह प्रभावित करेगी। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से निर्यात के पारंपरिक क्षेत्रों में ऐसा होगा।
पीएम मोदी का किया जिक्र
रविवार को ट्रंप ने कहा था, 'वे (भारत) वास्तव में मुझे खुश करना चाहते थे। मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। वह नेक दिल हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं थाा और मुझे खुश करना उनके लिए महत्वपूर्ण था। वे व्यापार करते और हम उन पर कभी भी शुल्क बढ़ा देते। यह उनके लिए बहुत बुरा होगा।'
ट्रंप की ये टिप्पणी तब आई जब एयर फोर्स वन में उनके साथ यात्रा कर रहे अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए शुल्क ही वह 'बड़ी वजह' है जिसकी वजह से भारत अब रूस से काफी कम तेल खरीद रहा है।
ग्राहम ने कहा, 'करीब एक महीने पहले मैं भारतीय राजदूत के घर गया था और वह बस इसी बारे में बात कर रहे थे कि वे रूस से कम तेल खरीद रहे हैं। क्या आप राष्ट्रपति से शुल्क हटाने का अनुरोध करेंगे?'

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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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