'मुझे तो लगा कि लोग नफरत करते थे', खामेनेई की अंतिम विदाई की भीड़ देख दंग रह गए डोनाल्ड ट्रंप
ईरान के मारे गए सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई की अंतिम विदाई में अथाह भीड़ को देखकर डोनाल्ड ट्रंप भी दंग रह गए। उन्होंने कहा, मुझे तो लगता था कि लोग खामेनेई से नफरत करते हैं।

ईरान के मारे गए सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई में आने वाले लोगों की अथाह भीड़ देखकर डोनाल्ड ट्रंप भी दंग रह गए हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे तो लगता था कि लोग खामेनेई से नफरत करते हैं।' उन्होंने कहा कि मुझे लगा था कि खामेनेई की मौत पर लोग खुश होंगे लेकिन यहां तो कुछ और ही देखेने को मिल रहा है। बता दें कि अमेरिका और इजरायल के हमले में 28 फरवरी को आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी। अब उनके शव को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में अंतिम विदाई के लिए रखा गया है। उनके साथ ही उनके परिवार के भी उन लोगों को विदाई दी जा रही है जो कि अमेरिका के हमले में मारे गए थे।
खामेनेई को अंतिम विदाई देने आने वाली भीड़ छाती पीट-पीटकर मातम मनाती है। बहुत सारे लोगों का कहना है कि इस हत्या का बदला अमेरिका और इजरायल से लिया जाएगा। जानकारों का कहना है कि ईरान में जो माहौल है उससे नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को बल मिलेगा।
कवि ने ट्रंप की हत्या का किया आह्वान
यातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान प्रस्तुति देने वाले एक कवि ने देश की राजधानी तेहरान में रविवार को लाखों लोगों की भीड़ के सामने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मार डालने का आह्वान किया। कवि मोहम्मद रसूली ने भीड़ से 'अमेरिका मुर्दाबाद' और 'इजराइल मुर्दाबाद' के नारे लगवाए। रसूली ने ट्रंप का जिक्र करते हुए भीड़ से पूछा, 'दुनिया का सबसे दुष्ट व्यक्ति अब तक जीवित क्यों है?' उनकी इस बात का भीड़ ने समर्थन किया।
11 जुलाई को फिर शुरू हो सकती है वार्ता
ईरान युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। इस बीच, यह आशंका भी बनी हुई है कि इजराइल फिर हमला कर सकता है। युद्ध के कारण अंतिम संस्कार में देरी हुई और अंतिम संस्कार पूरा होने तक वार्ता रोक दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 11 जुलाई को फिर से वार्ता शुरू हो सकती है। ईरान और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों के बीच 21 जून को पाकिस्तान एवं कतर की मध्यस्थता में उच्च स्तरीय विचार-विमर्श हुआ, जिसके बाद 22 जून को दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में तकनीकी वार्ता हुई थी।
पिता के अंतिम संस्कार में नहीं शामिल हुए मोजतबा
मोजतबा खामेनेई पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो रहे हैं। सुरक्षा अधिकारियों को डर है कि इजरायल या तो उनकी हत्या कर देगा या फिर उनके सार्वजनिक रूप से सामने आने का उपयोग उनके छिपने के ठिकाने का पता लगाने के लिए करेगा। मोजतबा ने नौ जुलाई को मशहद में अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने और पारंपरिक अंतिम संस्कार की रस्में निभाने के लिए धार्मिक सुरक्षा प्रहरियों से अनुमति मांगी थी।सुरक्षा अधिकारियों ने हालांकि उनकी सुरक्षा चिंताओं के कारण अब तक इस अनुरोध की अनुमति नहीं दी है।
मोजतबा केवल लिखित संदेश ही भेज रहे हैं। उन्होंने कथित तौर पर अमेरिका से बातचीत की इजाजत दे दी थी, हालांकि ईरान के कट्टरपंथियों ने यह जिद पकड़ रखी है कि जब तक वह कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं करते या कोई ऑडियो संदेश नहीं देते, तब तक वे कूटनीति का विरोध करना जारी रखेंगे।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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