
‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि मैंने 1 करोड़ लोगों की जान बचाई’, डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कैसे
यह घटना अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ी है, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की मौत हुई थी। भारत ने इसके जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोकने वाले दावे को फिर दोहराया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें कम से कम 10 मिलियन (1 करोड़) लोगों की जान बचाने के लिए धन्यवाद दिया। ट्रंप ने दावा किया कि दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच संघर्ष रोककर उन्होंने बड़ा योगदान दिया और इससे वे नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं। ट्रंप ने कहा, 'एक साल में हमने 8 शांति समझौते किए, गाजा युद्ध समाप्त किया और मध्य पूर्व में शांति स्थापित की। भारत-पाकिस्तान जैसे दो परमाणु देशों के बीच लड़ाई रोकना अद्भुत था।' ट्रंप ने मई 2025 से लगातार यह दावा दोहराया है कि उनकी दबाव की वजह से दोनों देशों में शांति बनी।
यह घटना अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ी है, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की मौत हुई थी। भारत ने इसके जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। यह अभियान 6 से 10 मई 2025 तक चला, जिसमें भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति दिखाई। 10 मई को पाकिस्तान के डीजीएमओ ने अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क कर संघर्ष समाप्त करने का अनुरोध किया, जिसके बाद सीजफायर पर सहमति बनी। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, यह सीजफायर दोनों देशों के बीच सीधे संपर्क से हुआ, किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी। भारत ने हमेशा तीसरे देश की मध्यस्थता से इनकार किया है।
शांति का नोबेल पुरस्कार मांग रहे ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप के दावों के बीच एक अन्य घटना में वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना माचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति को अपना नोबेल पदक भेंट किया, जिसे ट्रंप ने परस्पर सम्मान का अद्भुत इशारा बताया। हालांकि, नॉर्वेजियन नोबेल समिति के अनुसार, एक बार दिया गया पुरस्कार वापस नहीं लिया जा सकता, साझा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। ट्रंप के बार-बार दोहराए जा रहे दावों पर भारत की ओर से स्पष्ट इनकार है कि कोई बाहरी हस्तक्षेप नहीं था। यह मुद्दा ट्रंप की विदेश नीति उपलब्धियों और नोबेल की मांग से जुड़ा प्रचार बन गया है, जबकि भारत-पाकिस्तान संबंध सीधे द्विपक्षीय प्रयासों पर आधारित रहे।

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Niteesh Kumarलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




