वो मुझे मारता, उससे पहले मैंने ही उसे मार दिया; खामेनेई की मौत पर कैसी-कैसी सफाई दे रहे ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत को सही ठहराते हुए कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। जानिए इस युद्ध के पीछे के कारण, ट्रंप की मीडिया रणनीति और सैन्य विश्लेषकों की चिंताएं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान के खिलाफ चलाए गए विनाशकारी हवाई अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को लेकर कई स्पष्टीकरण दिए हैं। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई है। ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई को जायज ठहराने के लिए एक बेहद सीधा तर्क दिया: इससे पहले कि वह मुझे मारता, मैंने उसे मार गिराया। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा- उन्होंने दो बार (मुझे मारने की) कोशिश की, लेकिन मैंने उन्हें पहले ही खत्म कर दिया। हालांकि, विभिन्न पोल्स के अनुसार अधिकांश अमेरिकी इस युद्ध को लेकर शंका और बेचैनी में हैं। इसके बावजूद, ट्रंप ने कई अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स (लगभग दस इंटरव्यू) के जरिए अपने पक्ष में एक जटिल कहानी बुनने की कोशिश की है।
हमले के पीछे के तीन मुख्य कारण
विभिन्न इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ इस अचानक और हिंसक हमले के तीन बड़े कारण बताए।
- हत्या की साजिश: एक अत्यंत खुफिया जानकारी के अनुसार, अमेरिका में एक ईरानी सेल अमेरिकी धरती पर हत्या की साजिश रचने से महज कुछ दिन दूर था।
- चुनावी हस्तक्षेप: ईरान अमेरिकी चुनावों में दखलंदाजी कर रहा था।
- परमाणु खतरा: सीएनबीसी और वाशिंगटन पोस्ट से बातचीत में उन्होंने सबसे गंभीर दावा किया कि ईरान एक कार्यात्मक परमाणु हथियार बनाने से कुछ हफ्ते या शायद कुछ ही दिन दूर था।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों ने ट्रंप के इन दावों की पुष्टि के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए हैं। आलोचकों का आरोप है कि ट्रंप इजरायल और सऊदी अरब के इशारे पर ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए अमेरिकी जनता को गुमराह कर रहे हैं। सर्वेक्षण बताते हैं कि अधिकांश अमेरिकी इस सैन्य कार्रवाई के खिलाफ हैं; केवल एक-चौथाई (मुख्यतः रिपब्लिकन) ही इसका समर्थन कर रहे हैं।
मीडिया रणनीति: हर दर्शक के लिए अलग संदेश
लगातार इंटरव्यू और सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए ट्रंप देश में विरोध के सुर मजबूत होने से पहले न्यूज साइकिल पर हावी होना चाहते हैं। उन्होंने अलग-अलग दर्शकों के हिसाब से अपने संदेश को बड़ी चतुराई से ढाला है।
उदारवादी दर्शकों के लिए (The Atlantic): उन्होंने ईरानी लोगों की स्वतंत्रता की बात की।
कट्टरपंथी दर्शकों के लिए (Fox News): उन्होंने ईरानी नौसेना को पूरी तरह नष्ट करने पर जोर दिया।
विरोधाभास और नेतृत्व का शून्य
ट्रंप की इस पीआर रणनीति में कई भारी विरोधाभास भी सामने आए हैं।
'वेनेजुएला मॉडल' का दावा: रविवार को उन्होंने 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' से कहा कि यह ऑपरेशन "वेनेजुएला मॉडल" पर आधारित था, जिसमें सत्ता का त्वरित हस्तांतरण होता है।
सब खत्म हो गए: लेकिन सोमवार को सीएनएन से बातचीत में उन्होंने शेखी बघारते हुए माना कि हमले इतने घातक थे कि संभावित उत्तराधिकारियों में से अधिकांश मारे गए हैं। उन्होंने कहा- दूसरे या तीसरे स्थान के सभी लोग मर चुके हैं। मेरे अलावा कोई और यह नहीं कर सकता था।
ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि ईरान के बचे हुए गिने-चुने नेताओं में से एक ने उनसे संपर्क किया है और उन्होंने एक व्यावहारिक उत्तराधिकारी आने पर प्रतिबंधों में छूट का संकेत दिया है।
ट्रंप ने सत्ता परिवर्तन के तीन संभावित परिदृश्य भी सामने रखे: (1) ईरानी सेना (IRGC) जनता के सामने हथियार डाल दे, (2) नौकरशाह अपनी जगह रहें लेकिन शीर्ष नेतृत्व बदल जाए, या (3) ईरानी जनता खुद सत्ता पर कब्जा कर ले।
सैन्य विश्लेषकों की चिंताएं और प्लान बी की कमी
ट्रंप भले ही दावा कर रहे हों कि ईरान की नौसेना और कमांड को नष्ट करने के बाद अभियान तय समय से काफी आगे है, लेकिन सैन्य विश्लेषक उनकी बताई गई '4 सप्ताह की समय सीमा' को संदेह की नजर से देख रहे हैं। चूंकि अब ईरान में कोई स्पष्ट नेतृत्व नहीं बचा है, इसलिए विश्लेषकों को डर है कि अमेरिका बिना किसी 'प्लान बी' के एक ऐसे अंतहीन युद्ध में फंस गया है जिसका कोई स्पष्ट समाधान नहीं है।
दोहरी छवि: कमांडर और नेगोशिएटर
लगातार हो रही बमबारी के बीच भी ट्रंप खुद को एक 'शांति-चाहने वाले वार्ताकार' के रूप में भी पेश कर रहे हैं। उनका दावा है कि बचे हुए ईरानी अधिकारी बात करना चाहते हैं, हालांकि तेहरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने किसी भी बातचीत से साफ इनकार किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा- वे बात करना चाहते हैं। मैंने कहा 'बहुत देर हो चुकी है!
अपने बयानों को लगातार बदलते हुए ट्रंप हर संभावित स्थिति को कवर करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर ईरानी शासन जल्दी गिरता है, तो वह इसे 'आजादी की ऐतिहासिक जीत' बताएंगे। अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो वह 'अमेरिकी जान बचाने के लिए खतरों को बेअसर करने' का दावा करेंगे। फिलहाल, पूरी दुनिया एक ऐसे युद्ध को देख रही है जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति अपने फोन कॉल और सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए रियल-टाइम में नरेट कर रहे हैं।
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