'सोर्स बताओ या जेल जाओ', पत्रकारों पर बुरी तरह भड़के ट्रंप; सरकार में बैठे 'भेदिए' की खोज जारी

Apr 07, 2026 07:07 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, वाशिंगटन
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ट्रंप ने ईरान से अमेरिकी वायुसैनिक के रेस्क्यू पर बड़ा दावा किया है। उन्होंने अमेरिकी सरकार में 'भेदिया' होने की आशंका जताई और खुफिया जानकारी लीक करने वाले पत्रकार को जेल भेजने की धमकी दी है।

'सोर्स बताओ या जेल जाओ', पत्रकारों पर बुरी तरह भड़के ट्रंप; सरकार में बैठे 'भेदिए' की खोज जारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान से एक अमेरिकी वायुसैनिक (एयरमैन) को सुरक्षित निकाले जाने के अभियान पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए अमेरिकी सरकार के भीतर ही किसी 'भेदिए' के होने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि ये भेदिया जानकारी लीक कर रहा है।

सरकार में 'भेदिए' की तलाश

राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनका प्रशासन उस खुफिया जानकारी लीक करने वाले को खोजने के लिए बहुत कड़ी मेहनत कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस अज्ञात व्यक्ति ने न केवल एक बेहद संवेदनशील अमेरिकी बचाव अभियान को खतरे में डाला, बल्कि उस वेपन्स सिस्टम ऑफिसर की जान को भी जोखिम में डाल दिया जिसे ईरान के ऊपर अमेरिकी F-15E विमान के मार गिराए जाने के कई दिनों बाद दुश्मन के इलाके से रेस्क्यू किया गया था।

पत्रकार को जेल भेजने की चेतावनी

ट्रंप ने उस पत्रकार को भी कानूनी कार्रवाई और जेल भेजने की खुली धमकी दी है, जिसने सबसे पहले यह खबर छापी थी कि अमेरिकी सेना अपने लापता वायुसेना अधिकारी की तलाश कर रही है। ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा- जिस व्यक्ति ने यह खबर छापी है, अगर वह अपने सूत्रों का नाम नहीं बताता है तो वह जेल जाएगा, और यह जेल की सजा कम नहीं होगी।

हालांकि ट्रंप ने किसी पत्रकार या समाचार संगठन का विशेष रूप से नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अत्यधिक गोपनीय जानकारी सार्वजनिक होने से ईरानी सेना सतर्क हो गई थी कि पहले पायलट के बचाए जाने के बाद भी एक दूसरा अमेरिकी सैनिक वहां मौजूद है। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स', 'फॉक्स न्यूज' और 'एक्सियोस' उन प्रमुख मीडिया संस्थानों में शामिल थे, जिन्होंने सबसे पहले इस घटना की रिपोर्टिंग की थी।

रेस्क्यू ऑपरेशन का विशाल पैमाना

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दुश्मन की सीमा के भीतर से अपने अधिकारी को सुरक्षित निकालने के लिए चलाए गए बचाव अभियान की विशालता का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में कुल 155 विमानों के बेड़े का इस्तेमाल किया गया था, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:

  • 4 बमवर्षक
  • 64 लड़ाकू विमान
  • 48 रिफ्यूलिंग टैंकर (हवा में ईंधन भरने वाले विमान)
  • 13 बचाव विमान

ईरानी सेना को चकमा देने की रणनीति

ट्रंप ने बताया कि इतने बड़े पैमाने पर विमानों को भेजने का एक मुख्य उद्देश्य ईरानी सेना को गुमराह करना था, जो खुद अमेरिकी क्रू मेंबर की तलाश कर रही थी। न्यूज एजेंसी एपी के अनुसार, ट्रंप ने कहा: हम उन्हें (ईरानी सेना को) हर दिशा में भटका रहे थे और यह काफी हद तक एक छलावा था। हम चाहते थे कि वे सोचें कि वह (अमेरिकी सैनिक) किसी दूसरी जगह पर है।"

घायल वायुसैनिक का संघर्ष और बहादुरी

विमान क्रैश होने के बाद की स्थिति को समझाते हुए ट्रंप ने कहा कि जब दुश्मन के इलाके में कोई विमान गिरता है, तो वे (दुश्मन) सीधे उसी जगह की ओर भागते हैं, ऐसे में आप वहां से जितना हो सके उतना दूर जाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि घायल अमेरिकी अधिकारी ने भी घटनास्थल से तेजी से दूर जाने का प्रयास किया। ट्रंप के मुताबिक, वायुसैनिक का काफी खून बह रहा था, लेकिन इसके बावजूद वह उबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाके पर चढ़ने और अमेरिकी सेना से संपर्क कर उन्हें अपनी सटीक लोकेशन बताने में सफल रहा, जिसके बाद यह सफल रेस्क्यू ऑपरेशन अंजाम दिया गया।

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