नया नहीं है ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार प्रेम, एपस्टीन फाइलों में भी इसका जिक्र; खुलासा

Feb 15, 2026 07:50 am ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप के नोबेल शांति पुरस्कार के प्रति प्रेम का जिक्र एपस्टीन फाइल्स में भी है। ट्रंप के करीबी स्टीव बैनन को लिखे एक मेल में एपस्टीन कहता है कि अगर ट्रंप को पता चला कि अब तुम ऐसे व्यक्ति के दोस्त हो जो नोबेल का फैसला करने वाला है, तो उसका सिर फट जाएगा।

नया नहीं है ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार प्रेम, एपस्टीन फाइलों में भी इसका जिक्र; खुलासा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर दिखाया गया प्रेम दुनिया में किसी से छिपा नहीं है। ट्रंप ने हर तरीके से प्रयास करके आखिरकार वेनेजुएला की मचाडो से नोबेल शांति पुरस्कार ले ही लिया। इन सब के बीच अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी की जा रही एपस्टीन फाइल्स में भी डोनाल्ड ट्रंप के नोबेल पुरस्कार के प्रति प्रेम का जिक्र किया गया है। यहां पर एक ईमेल में एपस्टीन ट्रंप के सहयोगी को लिखता है कि डोनाल्ड को अगर इस बात का पता चलेगा कि नोबेल समिति का चेयरमैन यहां रुका हुआ है तो उसका सिर फट जाएगा।

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी की गई बदनाम फाइनेंशर जेफ्री एपस्टीन की फाइलों में सामने आया है कि उसने नोबेल शांति पुरस्कार समिति के चैयरमेन रहे थॉरबोर्न यागलैंड के साथ अपने संबंधों के जरिए बिल गेट्स और स्टीव बैनन जैसे कई प्रभावशाली लोगों के साथ दोस्ती की थी। गौरतलब है कि यागलैंड 2009 से लेकर 2015 तक नोबेल समिति के प्रमुख रहे थे।

फाइल्स से मिली जानकारी के मुताबिक यागलैंड से एपस्टीन की मुलाकात करवाने वाले नॉर्वेजियन राजनयिक थे, जो कि इजरायल और फिलिस्तीन के बीच ओसलो अकॉर्ड साइन करवाने के लिए जाने जाते हैं।

यॉगलैंड का कई बार जिक्र

यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में यागलैंड का नाम कई हजार बार सामने आता है। हालांकि अभी तक जितनी भी फाइलें सामने आई हैं, उसमें पुरस्कार के लिए किसी के नाम पर लॉबिंग की बात सामने नहीं आई है, लेकिन इतना साफ है कि एपस्टीन ने यागलैंड से अपनी दोस्ती के चलते कई बड़े नामों से अपनी दोस्ती मजबूत की। रिपोर्ट्स के मुताबिक एपस्टीन ने एक मेल में इस बात की जानकारी दी है कि 2010 में उसने यागलैंड को न्यूयॉर्क और पेरिस स्थिति अपनी संपत्तियों में ठहरने की मदद की थी।

डोनाल्ड ट्रंप के करीबी को किया मैसेज

यागलैंड का जिक्र करते हुए एपस्टीन ने 2018 में डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी स्टीव बैनन को भी एक मेल किया था, जिसमें उसने ट्रंप के शांति पुरस्कार के प्रति प्रेम का जिक्र किया था। एक मेल में एपस्टीन ने लिखा, "डोनाल्ड का सिर फट जाएगा अगर उसे पता चले कि तुम अब उस व्यक्ति के दोस्त हो जो सोमवार को नोबेल शांति पुरस्कार का फैसला करेगा।”

कई लोगों को नोबेल समिति के अध्यक्ष के नाम पर फंसाने की कोशिश

एपस्टीन ने यागलैंड के नाम पर कई लोगों के साथ दोस्ती स्थापित करने की कोशिश की थी। एपस्टीन ने यागलैंड का नाम लेकर वाइट हाउस की पूर्व कानूनी सलाहकार कैथी रूमलर को भी एक मेल भेजा था, जिसमें उसने लिखा, "नोबेल शांति पुरस्कार के प्रमुख मिलने के लिए आ रहे हैं, क्या आप जुड़ना चाहेंगी?"

इसके अलावा एपस्टीन ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी लैरी समर्स को भी मेल किया था, जिसमें उसने लिखा, “नोबेल शांति पुरस्कार के प्रमुख मेरे यहां ठहरे हुए हैं, अगर आपकी रुचि हो।”2014 में एपस्टीन ने बिल गेट्स को लिखे एक ईमेल में बताया कि यागलैंड को काउंसिल ऑफ यूरोप के प्रमुख के रूप में दोबारा चुना गया है। इसके जवाब में गेट्स ने लिखा, “मेरा ख्याल है कि उनकी शांति पुरस्कार समिति की भूमिका भी अब अनिश्चित होगी?”

गौरतलब है कि यागलैंड के नोबेल पुरस्कार समिति के अध्यक्ष के तौर पर रहते 2009 में बराक ओबामा और 2012 में यूरोपीय संघ को नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। एपस्टीन फाइ्ल्स में नाम आने के बाद यागलैंड को ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। इसके बाद नार्वे की आर्थिक अपराध इकाई इन मामलों की जांच कर रही है।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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