ट्रंप की धमकियों के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड बेस पर भेजा मिलिट्री एयरक्राफ्ट, हमले की तैयारी?
इससे पहले ट्रंप ने डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन पर 10 टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। इन देशों ने एक सैन्य अभ्यास के तहत ग्रीनलैंड में अपने सैनिक भेजे थे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकियों के बीच अब अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया जिससे तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका ने हाल ही में ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस पर एक नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) विमान की तैनाती कर दी है। मिलिट्री एयरक्राफ्ट की तैनाती को लेकर अमेरिका का कहना है कि यह विमान अपने पुराने लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। अमेरिका ने यह भी कहा कि यह कार्रवाई डेनमार्क और ग्रीनलैंड को बताकर की गई है।
बता दें कि पिटुफिक स्पेस बेस एक अहम अमेरिकी मिलिट्री इंस्टॉलेशन और कम्युनिकेशन हब है। यहां एक मिसाइल वॉर्निंग सिस्टम भी है जो उत्तर अमेरिका की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। वहीं हाई आर्कटिक में इसकी लोकेशन को वजह से इस क्षेत्र में इसका अहम रणनीतिक महत्व है।
अमेरिका से पहले डेनमार्क ने भी ग्रीनलैंड में अपनी मिलिट्री मौजूदगी बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार को कई डेनिश सैनिकों और मिलिट्री उपकरणों को ले जाने वाले कई विमान द्वीप पर उतारे गए हैं। डेनिश रक्षा बलों ने बताया है कि देश की सेना प्रमुख के साथ सैनिकों की एक बड़ी टुकड़ी को नुक और कांगेरलुसुआक में तैनात किया गया है। इससे पहले यहां डेनिश सुरक्षा बलों के नेतृत्व में एक मल्टीनेशनल मिलिट्री एक्सरसाइज भी हुआ था।
ट्रंप ने लगाया 10 फीसदी टैरिफ
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन पर 10 फीसदी अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी। ट्रंप ने इन देशों द्वारा ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस' नाम के एक सैन्य अभ्यास के तहत सैनिक तैनात करने के बाद यह कदम उठाया।
नाटो देशों का कहना है कि यह तैनाती ग्रीनलैंड की स्वायत्तता के समर्थन के लिए की गई थी, खासकर उन रिपोर्टों के बाद, जिनमें दावा किया गया था कि ट्रंप प्रशासन संसाधन-समृद्ध इस आर्कटिक द्वीप को "राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों" से अपने अधीन करना चाहता है।
इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि यह आयात शुल्क एक फरवरी से लागू होगा और एक जून से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह शुल्क तब तक लागू रहेगा जब तक ग्रीनलैंड की पूर्ण और सम्पूर्ण खरीद को लेकर कोई समझौता नहीं हो जाता। यूरोपीय नेताओं ने प्रस्तावित आयात शुल्क की कड़ी निंदा की है और चेतावनी दी कि इस तरह के कदम अटलांटिक पार संबंधों को कमजोर कर सकते हैं और एक खतरनाक गिरावट के चक्र को जन्म दे सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेनमार्क के नेतृत्व वाला सैन्य अभ्यास आवश्यक सुरक्षा जरूरतों के जवाब में है और इससे किसी को कोई खतरा नहीं है।
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