
US के पास भी खोने के लिए बहुत कुछ है; ग्रीनलैंड के मुद्दे पर इस यूरोपीय देश की ट्रंप को खरी-खरी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 10 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा करने के बाद फ्रांस ने भी आंखे तरेरी हैं। फ्रांस की कृषि मंत्री एनी ने कहा कि यूरोपीय देश के पास भी इस टैरिफ का जवाब देने की क्षमता है। इस टैरिफ युद्ध में अमेरिका को भी काफी कुछ गंवाना होगा।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के चलते अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच में जबरदस्त तनाव देखने को मिल रहा है। ग्रीनलैंड प्लान का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों के ऊपर ट्रंप ने अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ का ऐलान कर दिया है। ऐसे में यह तनाव और भी ज्यादा बढ़ गया है। दोनों ही पक्षों की तरफ से लगातार बयानबाजी जारी है। ट्रंप के 10 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा के बाद फ्रांस की कृषि मंत्री एनी जेनवार्ड ने ट्रंप को खरी-खरी सुनाई हैं। उन्होंने कहा कि इस टैरिफ का खामियाजा अमेरिका को भी भुगतना पड़ेगा।
एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक टैरिफ के मुद्दे पर फ्रांस का पक्ष रखते हुए जेनवार्ड ने कहा कि व्यापारिक दृष्टि से यूरोपीय संघ के पास भी जवाबी कार्रवाई की ताकत है, लेकिन अमेरिका के इस कदम से बेहद सावधानी के साथ निपटना होगा। क्योंकि अगर इस मुद्दे पर टकराव बढ़ता है, तो यह सभी के लिए घातक होगा।
ट्रंप को चेतावनी
उन्होंने कहा, "अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को बढ़ाने की जो होड़ शुरू की है। उसमें उन्हें भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ठीक वैसे ही जैसे उनके अपने किसान भी इसका नुकसान उठाएंगे।" इसके साथ ही एनी ने एक बार फिर से फ्रांस की स्थिति को साफ करते हुए कहा कि फ्रांस यूरोपीय देशों के साथ मिलकर अमेरिका को अपनी मनमानी नहीं करने देगा।
आपको बता दें शनिवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड समझौते पर सहमति न जताने वाले आठ देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ का ऐलान कर दिया था। इन देशों में डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी,यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड्स और फिनलैंड शामिल थे। इनमें से ब्रिटेन और नॉर्वे को छोड़कर बाकी सभी देश यूरोपीय संघ के सदस्य हैं। यह सभी टैरिफ फरवरी से लागू हो जाएंगे। इसके अलावा ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा कि अगर यह देश जून तक राजी नहीं होते हैं, तो इनके ऊपर टैरिफ बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया जाएगा।
इतना ही नहीं ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा कि यह टैरिफ तब तक लागू रहेगा, जब तक ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जा नहीं हो जाता या उसे पूरी तरह से खरीद नहीं लिया जाता।
इस पूरे मुद्दे को लेकर ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका की सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी प्रभुत्व का होना बहुत जरूरी है। हालांकि, नाटो का सदस्य देश होने के नाते डेनमार्क ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी सेना की तैनाती की पैरवी की थी, लेकिन ट्रंप इस पर नहीं माने। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड का मुद्दा उसी वक्त हल होगा, जब वहां पर अमेरिकी झंड़ा फहरेगा।

लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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