
रूस-ईरान समेत 75 देशों के लोगों की अमेरिका में नो एंट्री, ट्रंप ने दिया एक और झटका
फॉक्स न्यूज़ ने बुधवार को अमेरिकी विदेश विभाग के एक मेमो का हवाला देते हुए बताया कि ट्रंप प्रशासन 21 जनवरी से 75 देशों के आगंतुकों के लिए सभी वीज़ा प्रोसेसिंग सस्पेंड कर रहा है।
Immigrant VISA 75 Countries: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए रूस-ईरान समेत कुल 75 देशों के नागरिकों के लिए वीज़ा प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। फॉक्स न्यूज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह रोक 21 जनवरी से लागू होगी। रिपोर्ट में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक आंतरिक मेमो का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि अमेरिका के दूतावासों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मौजूदा कानूनों के तहत वीज़ा जारी न करें, जब तक कि वीज़ा प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा पूरी न हो जाए। यानी अगले सप्ताह से शुरू होने वाला यह बैन अनिश्चितकाल के लिए लागू होने जा रहा है।
कौन-कौन से देश शामिल?
रिपोर्ट के अनुसार, सोमालिया, रूस, ईरान, अफ़गानिस्तान, ब्राज़ील, नाइजीरिया, थाईलैंड, मिस्र और यमन भी प्रभावित 75 देशों की उस लिस्ट में शामिल हैं। वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट और विदेश मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि की है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह रोक कितने समय तक लागू रहेगी। यह फैसला ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीति का हिस्सा माना जा रहा है। जनवरी में पद संभालने के बाद से ही राष्ट्रपति ट्रंप ने आव्रजन को लेकर कड़े कदम उठाए हैं।
75 देशों की पूरी लिस्ट देखें
75 देशों की पूरी सूची में अफगानिस्तान, अल्बानिया, अल्जीरिया, एंटीगुआ और बारबुडा, आर्मेनिया, अजरबैजान, बहामास, बांग्लादेश, बारबाडोस, बेलारूस, बेलीज, भूटान, बोस्निया, ब्राजील, बर्मा, कंबोडिया, कैमरून, केप वर्डे, कोलंबिया, कोटे डी आइवर, क्यूबा, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, डोमिनिका, मिस्र, इरिट्रिया, इथियोपिया, फिजी, गैम्बिया, जॉर्जिया, घाना, ग्रेनाडा, ग्वाटेमाला, गिनी, हैती, ईरान, इराक, जमैका, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, कुवैत, किर्गिस्तान, लाओस, लेबनान, लाइबेरिया, लीबिया, मैसेडोनिया, मोल्दोवा, मंगोलिया, मोंटेनेग्रो, मोरक्को, नेपाल, निकारागुआ, नाइजीरिया, पाकिस्तान, कांगो गणराज्य, रूस, रवांडा, सेंट किट्स और नेविस, सेंट लुसिया, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइन्स, सेनेगल, सिएरा लियोन, सोमालिया, दक्षिण सूडान, सूडान, सीरिया, तंजानिया, थाईलैंड, टोगो, ट्यूनीशिया और युगांडा शामिल हैं। उरुग्वे, उज़्बेकिस्तान और यमन शामिल हैं।
कोई समय सीमा नहीं बताई गई
विदेश विभाग के प्रतिनिधियों ने रिपोर्ट किए गए मेमो पर टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया, जिसके बारे में फॉक्स न्यूज़ ने कहा कि यह अमेरिकी दूतावासों को मौजूदा कानून के तहत वीज़ा देने से इनकार करने का निर्देश देता है, जबकि विभाग अपनी प्रक्रियाओं का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है। कोई समय सीमा नहीं बताई गई।
ट्रंप ने पहले ही दिए थे संकेत
बता दें कि नवंबर में, ट्रंप ने व्हाइट हाउस के पास एक अफ़गान नागरिक द्वारा की गई गोलीबारी के बाद, जिसमें एक नेशनल गार्ड सदस्य मारा गया था, सभी "तीसरी दुनिया के देशों" से आप्रवासन को "स्थायी रूप से रोकने" का वादा किया था। फिलहाल यह साफ नहीं है कि वीज़ा प्रक्रिया दोबारा कब शुरू होगी। माना जा रहा है कि अमेरिका अपनी सुरक्षा और आव्रजन प्रक्रियाओं की समीक्षा के बाद अगला फैसला लेगा।

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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